दिल्ली से लेकर बिहार तक छिड़ी राजनीति की जंग
भारत में जातिगत जनगणना को लेकर एक नई राजनीतिक लड़ाई छिड़ी हुई है, जो दिल्ली से लेकर बिहार तक अपने असर दिखा रही है। विपक्षी दल इस मुद्दे को लेकर आपस में होड़ कर रहे हैं और अपने-अपने तरीके से श्रेय लेने की कोशिश कर रहे हैं। खासकर कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और समाजवादी पार्टी (सपा) जैसे प्रमुख दलों ने इस मुद्दे को अपनी राजनीतिक ताकत बढ़ाने का एक मौका मान लिया है। इसके साथ ही, दिल्ली और बिहार में पोस्टर वॉर ने स्थिति को और भी रोचक बना दिया है।

(Publish by : Tanya Pandey
Updated: May 01, 2025 11:29 am
Rajasthan, India)
पोस्टरों के माध्यम से श्रेय की तलाश
दिल्ली और बिहार में विभिन्न विपक्षी दलों द्वारा लगाए गए पोस्टरों में जातिगत जनगणना को लेकर दावा किया जा रहा है कि यह उनकी पार्टी की ही मेहनत और संघर्ष का परिणाम है। इन पोस्टरों में नेताओं की तस्वीरें और नारे आमतौर पर सामने आ रहे हैं, जिनमें जातिगत जनगणना के मुद्दे को उनके नेतृत्व में संभव बताया गया है। खासकर बिहार में नीतीश कुमार के नेतृत्व में आरजेडी और जेडीयू के नेताओं के बीच इस मुद्दे को लेकर जुबानी जंग तेज हो गई है। वहीं, कांग्रेस पार्टी ने भी इस मुद्दे पर अपनी जीत का दावा किया है, और उन्हें इस प्रक्रिया का श्रेय देने की कोशिश की है।
राजनीतिक माहौल में बदलाव की संभावना
जातिगत जनगणना का मुद्दा भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच चुका है। इससे न केवल समाज में जातीय समीकरणों को पुनः परिभाषित किया जा सकता है, बल्कि राजनीतिक दलों की रणनीतियों में भी बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। विपक्षी दल इसे समाज के निचले वर्ग के समर्थन को बढ़ाने का एक बड़ा अवसर मान रहे हैं। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में किस पार्टी को इस मुद्दे पर सबसे अधिक लाभ मिलता है।

