विधायक धालीवाल ने सरकार की विवादस्पद अध्यापक पदोन्नति नीति को लेकर विधानसभा में उठाये सवाल

फगवाड़ा 25 मार्च (शिव कौड़ा) पंजाब सरकार द्वारा सरकारी स्कूलों के अध्यापकों की पदौन्नति के साथ दूर-दराज के स्कूलों में की जा रही ट्रांसफर को लेकर जहां अध्यापक संगठनों में भारी रोष है, वहीं फगवाड़ा से कांग्रेस पार्टी के विधायक बलविन्द्र सिंह धालीवाल ने भी आज इस मुद्दे को विधानसभा में चेयर के समक्ष मजबूती से उठाया और सरकार की अध्यापक और शिक्षा नीति को लेकर कई तरह के सवाल किये।

विधायक धालीवाल ने कहा कि पंजाब सरकार ने करीब 1800 अध्यापक और हैड मास्टरों की पदोन्नति की है। लेकिन साथ ही उनका तबादला मूल निवास से इतनी दूर कर दिया है कि वे खुद ही पदौन्नति लेने से पीछे हट रहे हैं। उन्होंने बताया कि इसी वजह से 600 अध्यापकों ने पदोन्नति लेने से इंकार कर दिया है। धालीवाल ने बताया कि फगवाड़ा हलके में 19 अध्यापकों को पदोन्नति दी गई है। जिनमें से 16 अध्यापकों की नियुक्ति दूर-दराज के क्षेत्रों में की गई है। पंजाब में कुल 460 हैड मास्टर पदोन्नत किये गये हैं।

सरकार विवादस्पद नीति के चलते फगवाड़ा क्षेत्र के कुल 14 सरकारी स्कूलों में से 10 स्कूलों में हैड मास्टर की पोस्टें खाली हो गई हंै। उन्होंने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर तबादला करना ही है तो नई नियुक्ति पचास किलोमीटर के दायरे में की जानी चाहिये ताकि अध्यापक शाम को अपने घर वापिस लौट सकें। सरकारी पालिसी की नुक्ताचीनी करते हुए धालीवाल ने पूछा कि जिन स्कूलों में बच्चों की संख्या सरकारी पालिसी के अनुसार 300 से कम है वहां प्रिंसीपल की पोस्ट खत्म करना कहां तक उचित है? उन्होंने कहा कि खास तौर से महिला अध्यापकों के लिये दूर-दराज जाकर ड्यूटी करना बिल्कुल भी आसान नहीं है। जिन अध्यापकों के छोटे-छोटे बच्चे हैं वे भला दूसरे शहरों में रहकर स्कूलों में पढ़ाई कैसे कर सकते हैं।

अपने घर में बजुर्ग बच्चों की देखभाल कर सकते हैं लेकिन अनजान शहर में महिलाएं अकेली घर और स्कूल की दोहरी जिम्मेवारी को किस तरह निभा सकेंगी। दूसरी तरफ यदि घर का एकमात्र पुरुष सदस्य दूसरे शहर में अपनी ड्यूटी करेगा तो आपात स्थिति में महिलाओं को दिक्कत होगी। सरकार की यह नीति अध्यापकों को मानसिक तनाव में लाने वाली है। जिससे न तो वे स्कूल में ढंग से अपना कत्र्वय निभा सकते हैं और न घर की जिम्मेवारी ही निभा सकते हैं। धालीवाल ने कहा कि ज्यादातर अध्यापकों ने दूर-दराज के शहरों या गांवों में ड्यूटी ज्वायन करने से मना कर दिया है। जिससे स्कूलों में अध्यापकों की कमी हो गई है और बच्चों की पढ़ाई पर बुरा असर पड़ रहा है।

कुछ ही दिनों में स्कूलों में नया सैशन 2025-26 शुरु होने जा रहा है। इसलिए विद्यार्थियों की पढ़ाई के होने वाले नुकसान और अध्यापकों की परेशानी का भगवंत मान सरकार तुरंत संज्ञान लेकर पचास से साठ किलोमीटर के दायरे में अध्यापकों का तबादला करने पर विचार करे। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि सरकार ऐसा नहीं करती तो साफ हो जायेगा कि पंजाब सरकार का इरादा अध्यापकों को पदोन्नति देने का नहीं है। सरकार ने पदोन्नति का शगूफा छोड़ कर सिर पर ट्रांसफर की तलवार भी लटका दी है ताकि अध्यापक खुद ही पदोन्नति लेने से इंकार कर दें।

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