अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के साथ मौजूदा युद्धविराम को बढ़ाने का फैसला किया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब युद्धविराम की समयसीमा मंगलवार-बुधवार को समाप्त होने वाली थी।

ट्रंप ने ईरान के साथ मौजूदा युद्धविराम को बढ़ाने का फैसला किया है (AIgenerated)
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के साथ मौजूदा युद्धविराम को बढ़ाने का फैसला किया है। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट कर यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की अपील पर हमले फिलहाल रोक दिए गए हैं, ताकि ईरान की सरकार एकमत प्रस्ताव पेश कर सके।
तेहरान ने कहा, ‘हारने वाले पक्ष शर्तें तय नहीं करता’
इस घोषणा पर ईरान की ओर से तीखी प्रतिक्रिया आई है। ईरान के संसद अध्यक्ष के सलाहकार महदी मोहम्मदी ने इस कदम को खारिज करते हुए कहा कि हारने वाला पक्ष शर्तें नहीं थोप सकता, और साथ ही उन्होंने कहा कि ट्रंप द्वारा युद्धविराम बढ़ाने का ईरान के लिए कोई महत्व नहीं है। उन्होंने ईरान से अमेरिका के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू करने का आह्वान भी किया।
ट्रंप बोले- ईरान की सरकार गंभीर रूप से टूट चुकी है
ट्रंप ने लिखा कि ईरान की सरकार गंभीर रूप से टूट चुकी है, जैसा कि उम्मीद थी। पाकिस्तान के फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की अपील को ध्यान में रखते हुए हमने ईरान पर हमले कुछ समय के लिए रोकने का फैसला किया है। हालांकि, मैंने अपने सैन्य कमांडर्स को घेराबंदी पूरी तरह जारी रखने और लड़ाई के लिए पूरी तरह तैयार रहने का निर्देश दिया है।
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब अप्रैल 2026 में शुरू हुए अमेरिका-ईरान संघर्ष के बाद पाकिस्तान की मध्यस्थता में दो सप्ताह का युद्धविराम लागू था। युद्धविराम की समयसीमा मंगलवार-बुधवार को समाप्त होने वाली थी, लेकिन ट्रंप ने इसे अनिश्चितकाल के लिए बढ़ा दिया है।
होर्मुज स्ट्रेट पर स्थिति
अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों की नाकाबंदी जारी रखने का फैसला किया है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के तेल व्यापार का महत्वपूर्ण मार्ग पर अमेरिकी नौसेना की घेराबंदी बरकरार रहेगी। इससे पहले ईरान ने स्ट्रेट को बंद करने की धमकी दी थी और कुछ जहाजों पर टोल वसूली की कोशिश की थी, जिसके जवाब में अमेरिका ने नाकाबंदी शुरू की।
हाल ही में अमेरिकी बलों ने एक ईरानी झंडे वाले कार्गो जहाज को जब्त भी किया था। ट्रंप ने कहा कि नाकाबंदी ईरान की अर्थव्यवस्था को पूरी तरह तबाह कर रही है और कोई समझौता होने तक इसे नहीं हटाया जाएगा।

