
लखीमपुर। खरीफ सीजन को लेकर उर्वरक वितरण में गड़बड़ी पर प्रशासन ने सख्त रुख अपना लिया है। जिला कृषि अधिकारी सूर्य प्रताप सिंह ने साफ चेतावनी दी है कि निर्धारित दर से अधिक मूल्य वसूलने या किसानों को जबरन अन्य उत्पाद खरीदने के लिए मजबूर करने पर सीधे एफआईआर दर्ज होगी। हालिया निरीक्षण में 15 विक्रेताओं को कारण बताओ नोटिस, तीन के लाइसेंस निलंबित और एक का लाइसेंस निरस्त किया जा चुका है।
अधिकारी के मुताबिक जिले में खाद की कोई कमी नहीं है। वर्तमान में 20661 मीट्रिक टन यूरिया, 5524 मीट्रिक टन डीएपी, 16898 मीट्रिक टन एनपीके और 23532 मीट्रिक टन एसएसपी का भंडारण किया गया है। इसके बावजूद बाजार में अफवाहों को लेकर प्रशासन सतर्क है। किसानों से अपील की गई है कि वे घबराकर अनावश्यक भंडारण न करें और निर्धारित दर पर ही खाद खरीदें।
आधार कार्ड और खतौनी साथ लाना अनिवार्य
खाद खरीदते समय आधार कार्ड और खतौनी साथ लाना अनिवार्य किया गया है, साथ ही कैश मेमो लेना भी जरूरी है। शिकायत के लिए कंट्रोल रूम नंबर 7839882212 और समिति संबंधी समस्याओं के लिए 7007918909 जारी किए गए हैं।
धरती माता बचाओ अभियान के तहत संतुलित उर्वरक प्रयोग पर जोर दिया जा रहा है। एक हेक्टेयर में अधिकतम सात बोरी यूरिया और पांच बोरी डीएपी देने की सीमा तय की गई है। पीएम प्रणाम योजना के अंतर्गत किसानों को नैनो यूरिया और डीएपी के विकल्प के रूप में एसएसपी के उपयोग के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
उर्वरक की अनुशंसित मात्रा भी तय
फसलवार उर्वरक की अनुशंसित मात्रा भी तय की गई है। धान के लिए पांच बोरी यूरिया, तीन बोरी डीएपी और चार एनपीके, जबकि गन्ने में सात यूरिया, पांच डीएपी और छह एनपीके की सलाह दी गई है। दलहनी फसलों में यूरिया की जरूरत नहीं बताई गई है।
अधिकारियों ने साफ किया कि अधिक यूरिया का प्रयोग न केवल लागत बढ़ाता है, बल्कि कीट प्रकोप को भी बढ़ावा देता है। टाप ड्रेसिंग में प्रति एकड़ एक बोरी से अधिक यूरिया की आवश्यकता नहीं होती।
प्रशासन ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि उर्वरक वितरण में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और गड़बड़ी करने वालों पर लगातार कार्रवाई जारी रहेगी।

