
बांदा। चित्रकूट जेल में विधायक अब्बास अंसारी एवं उनकी पत्नी निकहत की कथित अवैध मुलाकात मामले में बुधवार को भ्रष्टाचार निवारण न्यायालय बांदा में सुनवाई हुई।
इस दौरान निलंबित जेल अधीक्षक संतोष कुमार सागर की ओर से दाखिल डिस्चार्ज प्रार्थना पत्र पर अदालत में दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं ने विस्तृत बहस की। हालांकि बहस पूरी नहीं हो सकी, जिसके चलते विशेष न्यायालय ने अगली सुनवाई के लिए 23 मई की तारीख तय की है।
सुनवाई के दौरान विधायक अब्बास अंसारी और उनकी पत्नी निकहत की ओर से अदालत में हाजिरी माफी का प्रार्थना पत्र भी प्रस्तुत किया गया। वहीं, निलंबित जेल अधीक्षक के अधिवक्ता ने कोर्ट में तर्क दिया कि उनके मुवक्किल को बिना पर्याप्त साक्ष्यों के मामले में फंसाया गया है और उनके खिलाफ आरोप साबित नहीं होते हैं।
दूसरी ओर अभियोजन पक्ष ने एसआईटी जांच व छापेमारी के दौरान मिले तथ्यों का हवाला देते हुए डिस्चार्ज प्रार्थना पत्र का विरोध किया। यह मामला 10 फरवरी 2023 को उस समय उजागर हुआ था, जब चित्रकूट जेल में तत्कालीन जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक ने संयुक्त छापा मारा था।
छापेमारी के दौरान अब्बास अंसारी की पत्नी निकहत जेल अधीक्षक के कक्ष में मिली थीं। जांच में सामने आया था कि वह नियमों के विपरीत लंबे समय तक जेल परिसर में मौजूद रहीं। इस घटना के बाद जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हुए थे।
मामले में कर्वी कोतवाली में विधायक अब्बास अंसारी, उनकी पत्नी निकहत, चालक ललक नियाज, तत्कालीन जेल अधीक्षक संतोष कुमार सागर, जेलर संतोष कुमार, डिप्टी जेलर चंद्रकला, जेल कैंटीन संचालक नवनीत सचान और सपा जिलाध्यक्ष फराज खान समेत कुल आठ लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। बाद में शासन स्तर पर गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने मामले की जांच की।
जांच में आरोप लगाया गया कि जेल में अब्बास अंसारी को विशेष सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती थीं और मुलाकात कराने के बदले जेल अधिकारियों को नकदी और उपहार दिए जाते थे। एसआईटी जांच के बाद सभी आरोपितों को जेल भेजा गया था। हालांकि वर्तमान में सभी आरोपी जमानत पर बाहर हैं, जबकि जेल अधीक्षक संतोष कुमार सागर और जेलर संतोष कुमार अभी भी निलंबित चल रहे हैं।
पहले यह मामला भ्रष्टाचार निवारण न्यायालय लखनऊ में विचाराधीन था, लेकिन बाद में अब्बास अंसारी से जुड़े मामलों को बांदा स्थित भ्रष्टाचार निवारण कोर्ट में स्थानांतरित कर दिया गया। बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान अपर जिला जज चंद्रपाल द्वितीय, विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण कोर्ट ने दोनों पक्षों की बहस अधूरी रहने पर अगली सुनवाई 23 मई को निर्धारित की।
माना जा रहा है कि अगली तारीख पर डिस्चार्ज प्रार्थना पत्र पर अंतिम बहस पूरी हो सकती है, जिसके बाद अदालत यह तय करेगी कि निलंबित जेल अधीक्षक को मामले से राहत दी जाए या उनके खिलाफ मुकदमे की कार्रवाई आगे बढ़ाई जाए।

