
गुरुग्राम। देशभर में स्मार्ट क्लासरूम और बड़े निजी स्कूलों के लिए पहचान रखने वाला गुरुग्राम इस बार हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड (एचबीएसई) की दसवीं परीक्षा के परिणाम में पीछे रह गया। करोड़ों रुपये की आधुनिक शैक्षणिक सुविधाओं और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर के बावजूद जिला प्रदेशभर में 18वें स्थान पर पहुंच सका। जिले का कुल परीक्षा परिणाम 89.44 प्रतिशत दर्ज किया गया है।
बोर्ड आंकड़ों के अनुसार जिले से 15,266 विद्यार्थियों ने परीक्षा दी थी, जिनमें से 13,654 छात्र पास हुए। पिछले साल गुरुग्राम 92.89 प्रतिशत परिणाम के साथ प्रदेश में 14वें स्थान पर था, लेकिन इस बार रैंकिंग और परिणाम दोनों में गिरावट दर्ज की गई है।
खास बात यह रही कि शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी माने जाने वाला जिला प्रदेश के टाप-10 जिलों में भी जगह नहीं बना सका। परिणाम सामने आने के बाद शिक्षा विभाग, निजी स्कूल संचालकों और अभिभावकों के बीच मंथन शुरू हो गया है। शिक्षा विभाग ने संकेत दिए हैं कि कमजोर प्रदर्शन वाले स्कूलों की अलग से समीक्षा कर आगामी सत्र के लिए विशेष रणनीति तैयार की जाएगी।
शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक सुविधाएं होने के बावजूद विद्यार्थियों के प्रदर्शन में अपेक्षित सुधार नहीं दिख रहा। उनका मानना है कि बोर्ड स्तर की तैयारी, कमजोर विद्यार्थियों की पहचान और नियमित अकादमिक मानिटरिंग पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है।
छोटे जिलों ने दिखाया दम, गुरुग्राम जैसे बड़े जिले पीछे
एचबीएसई की दसवीं परीक्षा के परिणाम में इस बार छोटे जिलों ने शानदार प्रदर्शन कर सबका ध्यान खींचा है। चरखी दादरी ने 96.01 प्रतिशत परिणाम के साथ प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया। इसके बाद जींद 94.68 प्रतिशत, महेंद्रगढ़ 93.96 प्रतिशत और पानीपत व रेवाड़ी 93.61 प्रतिशत परिणाम के साथ शीर्ष जिलों में शामिल रहे।
दूसरी ओर नूंह जिला 68.98 प्रतिशत परिणाम के साथ सबसे निचले पायदान पर रहा। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि छोटे जिलों में नियमित मानिटरिंग, अनुशासित अध्ययन व्यवस्था और कमजोर छात्रों पर विशेष फोकस बेहतर परिणाम का प्रमुख कारण है। वहीं गुरुग्राम जैसे संसाधन संपन्न जिले का 18वें स्थान पर पहुंचना शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है।

