
संभल। विवादित स्थल जामा मस्जिद की इंतेजामिया कमेटी ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण मेरठ मंडल कार्यालय को पत्र भेजकर मस्जिद की क्षतिग्रस्त दीवार और जर्जर मुख्य द्वार की मरम्मत कराने की इजाजत मांगी है। कमेटी का कहना है कि बंदरों के कारण पुलिस गार्द के ऊपर की दीवार गिर गई है और मुख्य द्वार भी हादसे का कारण बन सकता है।
एएसआइ संरक्षित इमारत जामा मस्जिद की इंतेजामिया कमेटी के सदर जफर अली ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण मेरठ मंडल कार्यालय को पत्र भेजकर मस्जिद की मरम्मत कराए जाने की मांग उठाई है। पत्र में बताया गया कि 11 फरवरी 2026 की दोपहर बंदरों ने मस्जिद के मुख्य गेट के बराबर स्थित पुलिस गार्द के ऊपर की दीवार को हिला दिया, जिससे दीवार का एक हिस्सा गिर गया।
जबकि कुछ हिस्सा अभी भी क्षतिग्रस्त हालत में लटका हुआ है, जो कभी भी गिर सकता है। कहा कि मस्जिद का मुख्य द्वार भी काफी जर्जर हो चुका है और इससे बड़ा हादसा होने की आशंका बनी हुई है। ऐसे में दीवार और मुख्य द्वार दोनों की जल्द मरम्मत कराना जरूरी है।
मालूम हो कि इससे पहले फरवरी 2025 में भी जामा मस्जिद कमेटी ने मस्जिद में रंगाई-पुताई की अनुमति मांगी थी। मामले में हाईकोर्ट से सशर्त अनुमति मिली थी। वहीं 19 नवंबर 2024 को सिविल जज (सीनियर डिवीजन) कोर्ट में जामा मस्जिद के मंदिर होने का वाद दायर किया गया था। कोर्ट के आदेश पर 24 नवंबर 2024 को कराए गए सर्वे के दौरान हिंसा भड़क गई थी।
इस हिंसा में चार लोगों की मौत हुई थी, जबकि करीब 30 पुलिसकर्मी और अधिकारी घायल हुए थे। घटना से जुड़े 12 मुकदमे अभी न्यायालय में विचाराधीन हैं। इसके अलावा आठ फरवरी 2026 को भी इंतेजामिया कमेटी ने ईद-उल-फितर से पहले रंगाई-पुताई की अनुमति मांगी थी, लेकिन एएसआई ने इंकार कर दिया था। अब एक बार फिर मस्जिद की मरम्मत और सुरक्षा को लेकर मांग उठाई गई है।

