
बादशाहपुर (गुरुग्राम)। जिला अदालत परिसर में बन रहे बहुचर्चित टावर ऑफ जस्टिस का इंतजार अब खत्म होने जा रहा है। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के आदेश के बाद तैयार हुए इस नए न्यायिक परिसर का शुभारंभ 12 जुलाई को भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआइ) सुर्यकांत द्वारा किया जाएगा। जिला एवं सत्र न्यायाधीश नरेंद्र सूरा ने जिला अदालत में तैनात सभी न्यायिक अधिकारियों और कर्मचारियों को इस ऐतिहासिक अवसर पर उपस्थित रहने के निर्देश जारी किए हैं।
जिला एवं सत्र न्यायाधीश कार्यालय की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि सभी न्यायिक अधिकारी और स्टाफ सदस्य 11 और 12 जुलाई को अपने स्टेशन पर मौजूद रहेंगे। किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को इन तिथियों में स्टेशन छोड़ने की अनुमति नहीं होगी। विशेष परिस्थितियों में ही पूर्व अनुमति के बाद अवकाश दिया जाएगा।
2014 में शुरू हुआ था निर्माण, नौ साल में बदली कई समय सीमाएं
टावर आफ जस्टिस परियोजना की शुरुआत 2014 में की गई थी। इसे गुरुग्राम में न्यायिक व्यवस्था को आधुनिक बनाने वाली महत्वाकांक्षी परियोजना के रूप में देखा गया था। शुरुआत में निर्माण कार्य वर्ष 2017 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन तय समय पर काम पूरा नहीं हो सका। इसके बाद समय सीमा बढ़ाकर 2020, फिर 2024 और बाद में 2025 तक की गई। अब यह परियोजना वर्ष 2026 में जाकर पूरी होने जा रही है।
113 करोड़ की परियोजना पहुंची करीब 295 करोड़ तक
परियोजना में देरी का असर इसकी लागत पर भी पड़ा। शुरुआती अनुमान के अनुसार निर्माण पर करीब 113 करोड़ रुपये खर्च होने थे, लेकिन तकनीकी बदलाव, निर्माण में देरी और अन्य प्रशासनिक कारणों से इसकी लागत बढ़कर लगभग 295 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।
एक छत के नीचे मिलेंगी न्यायिक सुविधाएं
टावर आफ जस्टिस का उद्देश्य जिला एवं सत्र न्यायालय की विभिन्न अदालतों, प्रशासनिक कार्यालयों और न्यायिक सुविधाओं को एक ही परिसर में लाना है। इससे न्यायिक कार्यों में तेजी आएगी और आम लोगों को भी बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी।
परियोजना में देरी के पीछे तकनीकी अड़चनें, डिजाइन में बदलाव, प्रशासनिक समन्वय की कमी और निर्माण की धीमी गति जैसे कारण बताए जाते रहे हैं। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की सक्रियता के बाद शेष कार्यों को तेजी से पूरा किया गया। अब वर्षों से प्रतीक्षित यह भवन साइबर सिटी की न्यायिक व्यवस्था को नई पहचान देने के लिए तैयार है।

