अधूरी इमारत का पूरा सर्टिफिकेट, गुरुग्राम की सेल्फ सर्टिफिकेशन पॉलिसी का खेल हजारों की जान पर भारी

 नया गुरुग्राम। गुरुग्राम की लाइसेंस कालोनियों में अधूरी और निर्माणाधीन इमारतों को आक्यूपेशन सर्टिफिकेट (ओसी) जारी करने के मामलों के सामने आने के बाद अब सेल्फ सर्टिफिकेशन पालिसी पर भी गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। मुख्यमंत्री उड़नदस्ता (सीएम फ्लाइंग) और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग की संयुक्त जांच में यह सामने आया है कि कई मामलों में भवन पूरी तरह तैयार नहीं थे, इसके बावजूद आर्किटेक्ट्स ने उन्हें रहने योग्य बताकर ओसी जारी कर दिए।

अवैध निर्माण को बढ़ावा मिला

आरोप है कि इन आर्किटेक्ट्स ने सेल्फ सर्टिफिकेशन पालिसी के तहत मिली शक्तियों का दुरुपयोग करते हुए हरियाणा बिल्डिंग कोड-2017 और अन्य नियामकीय प्रावधानों की अनदेखी की। विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान प्रणाली में निगरानी का दायरा सीमित होने के कारण कुछ मामलों में नियमों के विपरीत बने भवनों को भी ओसी जारी किए जाने की आशंका बनी रहती है। उनका मानना है कि इसी खामी का लाभ उठाकर कुछ आर्किटेक्ट्स द्वारा अधूरी अथवा निर्माणाधीन इमारतों को भी पूर्ण निर्माण दर्शाकर ओसी जारी किए गए हैं, जिससे अवैध निर्माण को बढ़ावा मिला है।

पहले डीटीपी प्लानिंग कार्यालय जारी करता था ओसी

इससे पहले ओसी जारी करने की पूरी प्रक्रिया टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग के नियंत्रण में होती थी। भवन का आर्किटेक्ट पूरी फाइल तैयार कर विभाग में जमा करता था, जिसके बाद संबंधित क्षेत्र का जूनियर इंजीनियर (जेई) मौके का निरीक्षण कर रिपोर्ट देता था।

इसके उपरांत सहायक नगर योजनाकार (एटीपी) द्वारा रिपोर्ट का सत्यापन किया जाता था। फाइल अकाउंट शाखा में भेजी जाती थी, जहां शुल्क और फीस मिलान किया जाता था। सभी स्तरों पर जांच पूरी होने के बाद जिला नगर योजनाकार (डीटीपी प्लानिंग) द्वारा अंतिम रूप से ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट जारी किया जाता था।

हाईकोर्ट में चुनौती देने की तैयारी

सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ अधिवक्ता निवेदिता शर्मा का कहना है कि सामने आए मामले बताते हैं कि सेल्फ सर्टिफिकेशन पालिसी का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग हो रहा है। जब निर्माणाधीन भवनों को भी पूर्ण दिखाकर ओसी जारी किए जा रहे हैं तो यह सीधे-सीधे भवन नियमों और सार्वजनिक सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है।

ऐसी स्थिति में इस पालिसी को तत्काल प्रभाव से बंद करने अथवा पूरी तरह पुनर्गठित करने की आवश्यकता है, ताकि जवाबदेही तय हो सके और भविष्य में ऐसे मामलों पर रोक लगाई जा सके। उन्होंने कहा कि वह इस नियमावली को चुनौती देते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर करेंगी।

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