
गुरुग्राम। हॉकी एस्ट्रोटर्फ ग्राउंड पर लगी फ्लड लाइट कुछ सालों से बंद है लेकिन, बिजली का बिल भरना लगातार जारी है। लाइट ठीक कराने पर किसी का ध्यान नहीं है लेकिन हर महीने 70-75 हजार रुपये से अधिक बिल बिजली विभाग में भरा जा रहा है। जबकि एक रुपये की बिजली का प्रयोग नहीं किया जा रहा।
दरअसल, नियम है कि आप ग्राउंड पर लगी फ्लड लाइट जलाए या नहीं जलाए। उसका तय बिल आएगा। क्योंकि फ्लड लाइट जलाने के लिए अलग से ट्रांसफार्म से लगाया गया है। इन फ्लड लाइटों को जलाने के लिए अधिक (पावर) लोड चाहिए होता। इसी लिए यह नियम है कि हर महीने 70 हजार से अधिक बिल भरना ही होगा।
यह सही है जिला स्तर पर बैठे खेल अधिकारियों के हाथ में फ्लड लाइट ठीक कराना हाथ में नहीं है लेकिन चंडीगढ़ बैठे उच्च अधिकारी इस पर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं।
तीन साल से लाइट बंद
जिला खेल अधिकारी ने पीडब्ल्यूडी विभाग द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट उच्च अधिकारियों के पास भेजी हुई है कि लाइट ठीक करने में करीब 80 लाख खर्च आएगा लेकिन इस को काेई आदेश नहीं मिला। जब तक उच्च अधिकारियों के पास से बजट और ठीक कराने के आदेश नहीं मिलते हैं तब तक कुछ नहीं हो सकता। करीब तीन साल से लाइट बंद है और बिल भरना जारी है।
ओलिंपिक खेलों में लाइट नहीं जलने पर हुई थी परेशानी
फ्लड लाइट ठीक कराने की मांग लगातार इस लिए रही, ताकि यहां पर राज्य स्तरीय और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताएं आयोजित हो सकेंगी। पिछले वर्ष सितंबर महीने में स्टेट ओलिंपिक खेलों में लाइट नहीं जलने के कारण परेशानी हुई थी। तब भी हरियाणा हाकी एसोसिएशन ने हरियाणा ओलिंपिक एसोसिएशन के अध्यक्ष के समक्ष मांग रखी थी कि यहां पर लाइट ठीक कराई जाए।

