गुरुग्राम नगर निगम सामुदायिक भवन की जमीन पर बना रहा था पार्षद कार्यालय, अदालत ने दिए यथास्थिति के आदेश

बादशाहपुर (गुरुग्राम)। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश यशविंदर पाल सिंह की अदालत ने सेक्टर-50 स्थित निरवाना कंट्री में सामुदायिक भवन के लिए आरक्षित भूमि पर निगम पार्षद कार्यालय निर्माण को लेकर बड़ा आदेश सुनाया है।

अदालत ने नगर निगम गुरुग्राम (एमसीजी) को फिलहाल निर्माण कार्य आगे बढ़ाने से रोकते हुए साइट पर यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए हैं।

अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया मामला निरवाना कंट्री आरडब्ल्यूए के पक्ष में बनता है। क्योंकि रिकॉर्ड में ऐसा कुछ नहीं है जिससे यह साबित हो कि नगर निगम ने मूल योजना में बदलाव या कार्यालय निर्माण के लिए डीटीसीपी से अनुमति ली हो।

निरवाना कंट्री आरडब्ल्यूए ने निचली अदालत के अंतरिम राहत देने से इनकार किए जाने को चुनौती दी। आरडब्ल्यूए ने आरोप लगाया कि सेक्टर-50 और 51 में विकसित निरवाना कंट्री में 2.099 एकड़ भूमि को मूल लेआउट प्लान में सामुदायिक भवन के लिए आरक्षित किया गया था। लेकिन अब उसी स्थान पर वार्ड-15 के पार्षद कार्यालय का निर्माण कराया जा रहा है।

बिना अनुमति नगर निगम ने शुरू किया निर्माण’

करीब 260.409 एकड़ में यूनिटेक ने विकसित किया। 2011 में डीटीसीपी द्वारा स्वीकृत लेआउट और जोनिंग प्लान में कम्युनिटी सेंटर के लिए निर्धारित किया गया था। बाद में कॉलोनी की सामान्य सुविधाओं का रखरखाव नगर निगम गुरुग्राम को सौंप दिया गया।

आरडब्ल्यूए ने अदालत में कहा कि नगर निगम ने बिना सक्षम प्राधिकरण की अनुमति के वहां कार्यालय निर्माण शुरू कर दिया। जो स्वीकृत प्लान का उल्लंघन है।

याचिका में यह भी कहा गया कि निवासियों ने कॉलोनी की सामुदायिक सुविधाओं के लिए भुगतान किया है और उस भूमि का उपयोग केवल सामुदायिक भवन के लिए ही किया जा सकता है।

निगम ने क्या कहा?

अधिवक्ता रामानंद यादव व परमानंद यादव ने अदालत में दलील दी कि डीटीसीपी और डीटीपी एनफोर्समेंट ने भी स्पष्ट किया है कि यह सामुदायिक भवन के लिए आरक्षित है तथा किसी भी निर्माण के लिए स्वीकृत भवन योजना आवश्यक है।

वहीं नगर निगम की ओर से कहा गया कि अभी लिखित जवाब दाखिल होना बाकी है और निर्माण सार्वजनिक उपयोग के उद्देश्य से किया जा रहा है। अदालत ने कहा कि यदि निर्माण जारी रहा तो इससे निवासियों को अपूरणीय क्षति हो सकती है और सार्वजनिक धन के व्यर्थ खर्च होने की संभावना भी बनी रहेगी।

अंतिम निर्णय तक साइट पर किसी भी प्रकार का नया निर्माण न किया जाए। वर्तमान स्थिति बरकरार रखी जाए। साथ ही ट्रायल कोर्ट को मामले का शीघ्र निस्तारण करने के निर्देश भी दिए।

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