गुरुग्राम: नशे में थार सवार ने बलेनो को रौंदा, पुलिस ने 12 घंटे बाद कराया मेडिकल

 गुरुग्राम। सोहना चौक पर शुक्रवार सुबह बलेनो कार को टक्कर मारने वाले जिस थार चालक पर शराब के नशे में गाड़ी चलाने का आरोप लगाया गया था, पुलिस ने उसका मेडिकल कराने में ही 12 घंटे का समय लगा दिया।

हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने इसे पकड़कर पुलिस के हवाले किया था। टक्कर से बलेनो सवार चड्ढा परिवार के चार लोग घायल हो गए। इनमें से दो की हालत अभी भी गंभीर है और वे कल्याणी अस्पताल में वेंटिलेटर पर जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं।

सोहना चौक पर हुए सड़क हादसे का एक सीसीटीवी फुटेज भी रविवार को सामने आया है। फुटेज में साफ दिख रहा है कि थार बेहद तेज रफ्तार में राजीव चौक से सोहना चौक पर आई। चौक पर भी उसने गति धीमी नहीं की और राजीव चौक की तरफ मुड़ रही बलेनो को सीधी टक्कर मार दी।

टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बलेनो करीब 10 फीट पीछे उछलकर डिवाइडर से जा टकराई। वहीं थार गाड़ी टक्कर के बाद सड़क पर तीन बार पलट गई। सीसीटीवी में यह भी दिखा कि हादसे के समय एक स्कूटी सवार वहां से गुजर रहा था, वह बाल-बाल बच गया।

घटना के तुरंत बाद आसपास के लोगों ने थार चालक सेक्टर 13 संजयग्राम कालोनी निवासी रोहित यादव को पकड़ लिया और शिवाजी नगर पुलिस के हवाले कर दिया था।हादसे में घायल हुईं शिवाजी नगर निवासी मीनाक्षी चड्ढा, उनका बेटा दिव्यांश, बेटी लक्षिता और रिश्तेदार यशिका को तुरंत अस्पताल ले जाया गया।

डाक्टरों के अनुसार दिव्यांश के सिर, गर्दन और पसलियों में फ्रैक्चर है और वह वेंटिलेटर पर हैं। यशिका की हालत भी गंभीर बनी हुई है। लक्षिता और मीनाक्षी का इलाज जारी है।

12 घंटे बाद कराया मेडिकल, FIR में हिरासत का जिक्र नहीं

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार रोहित शराब के नशे में था और हादसे के बाद उसने बलेनो सवार परिवार व उसे पकड़ने आए लोगों के साथ भी बद्तमीजी की। गाली-गलौज भी किया। इसके बावजूद पुलिस ने उसे हिरासत में लेने के बाद उसको मेडिकल जांच के लिए शाम साढ़े पांच बजे सिविल अस्पताल भेजा।

इसकी पुष्टि सिविल अस्पताल के इमरजेंसी रिकार्ड भी करते हैं। इमरजेंसी रिकार्ड में रोहित यादव के मेडिकल कराने का टाइम शाम पांच बजकर 32 मिनट का है। यानी हादसा सुबह पांच बजे हुआ और मेडिकल करीब साढ़े 12 घंटे बाद हुआ।

दूसरी ओर शुक्रवार शाम ही इस मामले में शिवाजी नगर थाना पुलिस द्वारा लिखी गई एफआइआर में भी युवक के हिरासत में होने का जिक्र नहीं किया गया। शनिवार को पुलिस प्रवक्ता की तरफ से मीडिया ग्रुप में एक नोट जारी कर उसे गिरफ्तार दिखाया गया।

विशेषज्ञ: देरी से जांच का सीधा फायदा आरोपित को

इस मामले में वरिष्ठ चिकित्सा विशेषज्ञ डा. शाहमत हुसैन का कहना है कि सड़क हादसे में शराब के शक के आधार पर चालक का मेडिकल हादसे के चार से छह घंटे के अंदर कराना सबसे जरूरी होता है। अल्कोहल शरीर में तेजी से मेटाबोलाइज होता है।

12 घंटे बाद कराए गए मेडिकल और ब्लड टेस्ट में शराब की मात्रा सही तरीके से नहीं आ पाती। कहा जा सकता है कि इतने समय बाद 10 प्रतिशत या जीरो अल्कोहल की मात्रा आती है। ऐसे में आरोपित को कानूनी तौर पर नशे में गाड़ी चलाने के आरोप से बचने का फायदा मिल सकता है।

फारेंसिक साक्ष्य कमजोर हो जाते हैं और कोर्ट में केस ढीला पड़ सकता है। ऐसे में हिरासत में होने के बावजूद इतनी देरी पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है।

अत्यधिक शराब के नशे में था आरोपित: थाना प्रभारी

देरी से मेडिकल टेस्ट के बारे में जब शिवाजी नगर थाना प्रभारी इंस्पेक्टर देवेंद्र मान से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि जब पुलिस टीम ने आरोपित को मौके से पकड़ा तो वह अत्यधिक शराब के नशे में था। वह गाली-गलौज कर रहा था।

पुलिस को डर था कि वह कहीं अस्पताल में डाक्टरों से गाली-गलौज न कर दे। इसलिए उसके थोड़ा होश में आने का इंतजार किया गया। पीड़ित के बयान भी दर्ज किए जा रहे थे। यह भी वेरिफाई करना था कि जिसे पकड़ा गया, वही चालक है या कोई दूसरा व्यक्ति। आरोपित को कोर्ट में पेश किया गया था। वहां से उसे जेल भेजा जा चुका है।

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