गुरुग्राम से वडोदरा सिर्फ 10 घंटे में, अभी लगते हैं 22 घंटे; दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे को लेकर आया बड़ा अपडेट

गुरुग्राम। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर राजस्थान के कोटा में बनाई गई सुरंग की सुरक्षात्मक जांच शुरू हो गई। एक सप्ताह तक जांच की जाएगी। जांच में यदि किसी भी कमी सामने नहीं आई तो 20 जून के बाद इसे चालू कर दिया जाएगा।

इसके चालू होते ही गुरुग्राम से वडोदरा तक का सफर आसान हो जाएगा, क्योंकि कोटा से पहले व कोटा के बाद वडोदरा तक एक्सप्रेसवे का निर्माण पूरा हो चुका है। इसके चालू होने से 10 घंटे से 12 घंटे की बचत होगी। फिलहाल गुरुग्राम से वडोदरा जाने में कम से कम 20 से 22 घंटे लग जाते हैं। चालू होने के बाद 10 से 12 घंटे में पहुंच सकेंगे।

दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे का निर्माण किया जा रहा

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली को देश की आर्थिक राजधानी मुंबई से जोड़ने के लिए 1380 किलोमीटर लंबे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे का निर्माण किया जा रहा है। प्रोजेक्ट का सबसे महत्वपूर्ण भाग कोटा में टनल का निर्माण था, जो हर स्तर पर पूरा हो चुका है। टनल को चालू करने से पहले सुरक्षात्मक जांच आवश्यक होती है। यह शुरू हो चुकी है।

कोटा में ही मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व है। इसमें सभी प्रकार के वन्यजीव काफी संख्या में हैं। वन्यजीव एक प्रतिशत भी अशांत न हों इसे ध्यान में रखकर 4.9 किलोमीटर लंबी सुरंग का निर्माण किया गया है। यह देश की पहली आठ लेन की सुरंग है। वन्यजीव अशांत न हों, इस वजह से टनल के निर्माण में काफी समय लग गया।

इसके चालू होते ही कोटा इलाके में लगभग 25 किलोमीटर घुमावदार रास्ताें से गुजरना नहीं पड़ेगा। वाहन सीधे निकल जाएंगे। घुमावदार रास्तों से गुजरने में न केवल समय अधिक लगता था बल्कि हर पल हादसा होने की भी आशंका रहती थी।

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के क्षेत्रीय अधिकारी मोहम्मद सफी का कहना है कि निर्माण पूरा होने के बाद टनल की सुरक्षात्मक जांच बहुत आवश्यक होती है। जांच टीम ने अपना काम शुरू कर दिया है।

इस साल पूरा हो जाएगा प्रोजेक्ट

सोहना के नजदीक गांव अलीपुर से शुरू आठ लेन का यह एक्सेस कंट्रोल्ड ग्रीन फील्ड एक्सप्रेसवे इस साल पूरा हो जाएगा। है। अब वडोदरा से मुंबई के बीच ही कुछ हिस्से का निर्माण शेष है। प्रोजेक्ट पूरा होते ही गुरुग्राम से मुंबई 24 घंटे की बजाय अधिक से अधिक 12 घंटे में पहुंच सकेंगे।

इस एक्सप्रेसवे पर अधिकतम स्पीड 120 किलोमीटर प्रतिघंटा निर्धारित है। फिलहाल प्रतिदिन औसतन 30 से 40 हजार वाहन निकल रहे हैं। प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद वाहनों की संख्या में 15 से 20 हजार की बढ़ोतरी तत्काल होने की संभावना है।

इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी खासियत है कि वाहनों का दबाव बढ़ने पर भविष्य में इसे आठ लेन की जगह 12 लेन तक किया जा सकता है। इसे ध्यान में रखकर ही 21 मीटर चौड़ा मीडियन बनाया गया है ताकि आवश्यकता पड़ने पर दोनों तरफ की लेन में बढ़ोतरी की जा सके।

कई हाईवे व एक्सप्रेसवे पर कम हो जाएगा ट्रैफिक दबाव

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) के पूर्व तकनीकी सलाहकार जेएस सुहाग का कहना है कि देश का सबसे बेहतर प्रोजेक्ट दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे है।

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