
गुरुग्राम। शहर पालम विहार, सेक्टर-23 और सेक्टर-23ए में लगभग 25 साल पुरानी पेयजल आपूर्ति लाइनाें में जंग लगने की आशंका है। यह लाइनें लोगों ने मुख्य लाइनों में सेक्टर बसने के समय मुख्य लाइनों में जोड़ी थी और इतने समय के बाद भी बदला नहीं गया है।
नगर निगम गुरुग्राम ने इन क्षेत्रों के निवासियों को एडवाइजरी जारी करते हुए अपील की है कि वे अपने घरों में लगे पुराने और क्षतिग्रस्त पेयजल कनेक्शनों की जांच कराएं और आवश्यकता पड़ने पर उन्हें नई स्वीकृत पाइपलाइन से बदलें, ताकि दूषित पानी की आशंका को रोका जा सके।
इसके अलावा नगर निगम की भी करीब 1200 किलोमीटर लंबी लाइन भी लगभग 25 साल पुरानी है, जिनको नगर निगम ने बदलना शुरू कर दिया है।
निगम अधिकारियों के अनुसार कई घरों में आज भी 20 से 25 साल पुराने जीआइ पाइप कनेक्शन उपयोग में हैं। समय के साथ इन पाइपों में जंग लगने और अंदर से गलने की संभावना बढ़ जाती है। यदि कहीं छोटा भी लीकेज हो जाए तो आसपास की गंदगी या सीवर का पानी लाइन में प्रवेश कर सकता है। जनवरी में इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों के बाद गुरुग्राम में भी सतर्कता बढ़ाई गई है।
घरों तक जाने वाली पुरानी लाइनें बन रहीं जोखिम
नगर निगम का कहना है कि मुख्य पेयजल लाइन से घरों तक जो निजी कनेक्शन लिए गए हैं, उनकी देखरेख की जिम्मेदारी उपभोक्ताओं की भी होती है। कई मकानों में शुरुआती समय में डाली गई जीआई पाइपलाइन अब काफी पुरानी हो चुकी है। पालम विहार और सेक्टर-23 जैसे इलाकों में बड़ी संख्या में ऐसे कनेक्शन मौजूद हैं।
अधिकारियों के अनुसार यदि घरेलू लाइनें क्षतिग्रस्त हों तो पानी का दबाव कम होने के दौरान बाहरी गंदगी अंदर खिंच सकती है। इसी कारण लोगों को समय रहते पाइपलाइन बदलने और अधिकृत सामग्री का उपयोग करने की सलाह दी गई है।
गर्मियों में बढ़ी पानी की मांग
शहर में इस समय भीषण गर्मी के कारण पानी की मांग बढ़ी हुई है। गुरुग्राम में नहरी स्रोतों और बोरवेल के माध्यम से पेयजल आपूर्ति की जा रही है। निगम का कहना है कि मौजूदा आपूर्ति पर्याप्त है, लेकिन पुरानी लाइनें भविष्य में स्वास्थ्य संबंधी जोखिम पैदा कर सकती हैं।
पुराने गुरुग्राम के कई इलाकों में समय-समय पर दूषित पानी की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि घरेलू स्तर पर पाइपलाइन बदलने से काफी हद तक समस्या कम की जा सकती है।
सेवानिवृत्त चीफ इंजीनियर प्रदीप कुमार के अनुसार पुरानी जीआई पाइपलाइनें समय के साथ अंदर से जंग खाकर कमजोर हो जाती हैं। यदि इनकी समय पर जांच और बदलाव नहीं किया गया तो संक्रमण और दूषित जलापूर्ति का खतरा बढ़ सकता है।
- 3 इलाके पालम विहार, सेक्टर-23 और सेक्टर-23ए पर नजर
- 20-25 साल घरेलू जीआइ कनेक्शनों की अनुमानित उम्र
- 670 एमएलडी नहरी स्रोतों से जलापूर्ति
- 100 एमएलडी बोरवेल से जलापूर्ति
- 680 एमएलडी इन दिनों पानी की मांग
- 2500 किलोमीटर शहर का कुल पेयजल नेटवर्क
- 1200 किलोमीटर 20-25 साल पुरानी निगम पेयजल लाइनें

