
गोरखपुर। जनगणना-2027 के पहले चरण की शुरुआत शुक्रवार को जिले में उत्साह और चुनौतियों के मिश्रण के साथ हुई। शहर से गांव तक बड़ी संख्या में प्रगणक घर-घर पहुंचे, दीवारों पर मकान संख्या दर्ज की और परिवारों से जुड़ी जानकारी जुटाने का काम शुरू किया, लेकिन पहले ही दिन उन्हें ऐसे अनुभवों से गुजरना पड़ा जिसने इस सरकारी प्रक्रिया को रोचक और मानवीय रंग दे दिया। कहीं लोग उन्हें बिजली विभाग का कर्मचारी समझ बैठे, कहीं सेल्समैन और कई जगह तो लोगों को यह समझाने में लंबा समय लग गया कि वे आखिर आए क्यों हैं।
इस बार जनगणना केवल जनसंख्या गिनने तक सीमित नहीं है। पहले चरण में मकानों की स्थिति, बुनियादी सुविधाएं और परिवारों से जुड़े 33 सवालों के आधार पर विस्तृत जानकारी जुटाई जा रही है। पहले दिन का मुख्य काम गणना ब्लाकों का नजरी नक्शा तैयार करना और मकानों पर नंबरीकरण करना रहा। कई सक्रिय प्रगणक पहले से अपने ब्लाक का नक्शा तैयार कर चुके थे, इसलिए वे सीधे लोगों के दरवाजे तक पहुंचे।
राप्तीनगर कालोनी में एक प्रगणक जैसे ही मकान की चहारदीवारी पर संख्या लिखने लगा, भीतर से निकले युवक ने उन्हें रोकते हुए कहा, “दीवार पर विज्ञापन वाला पोस्टर चिपकाया तो खैर नहीं ”। पहले तो युवक ने सख्ती दिखाई, लेकिन काफी देर तक समझाने के बाद जब उसे जनगणना की प्रक्रिया की जानकारी हुई तो उसने अपनी प्रतिक्रिया पर संकोच जताया और फिर प्रगणक को काम पूरा करने दिया।
उधर रुस्तमपुर में सुबह-सुबह एक घर के बाहर पहुंचे प्रगणक को अलग ही अनुभव हुआ। बालकनी में झाड़ू लगा रही महिला उन्हें देखते ही नाराज हो उठी और बोली, “बड़ी जल्दी बिल निकालने का मौका मिल गया, पांच महीने से कहां गायब थे?” महिला को लगा कि बिजली विभाग का कर्मचारी बिल या जांच के लिए आया है। जब प्रगणक ने परिचय पत्र दिखाते हुए जनगणना का उद्देश्य समझाया, तब स्थिति सामान्य हुई।
इलाहीबाग में तो एक प्रगणक को लगातार 10 घरों में अपनी पहचान बताने और लोगों को यह समझाने में मशक्कत करनी पड़ी कि वह किसी योजना का प्रचार करने नहीं, बल्कि जनगणना करने आया है। कई लोगों ने पहले सवाल ही किया—“किस विभाग से आए हैं?” कुछ ने समय की कमी का हवाला दिया तो कुछ निजी जानकारी साझा करने में हिचकते दिखे।
जिले में जनगणना के लिए कुल 9,322 गणना ब्लाक बनाए गए हैं, जिनमें 11,103 प्रगणक और पर्यवेक्षक लगाए गए हैं। प्रत्येक प्रगणक को लगभग 180 से 200 घरों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। नगर निगम क्षेत्र, सदर, गोला और बांसगांव तहसील में सबसे अधिक गणना प्रस्तावित है। नगर निगम क्षेत्र को पांच जोन में बांटकर 2,043 ब्लाक तैयार किए गए हैं, जबकि सदर में 1,492, गोला में 1,031 और बांसगांव में 957 ब्लाक निर्धारित हैं।
जानकारों के अनुसार, घर-घर सर्वे में सबसे बड़ी चुनौती लोगों की उपलब्धता, सही जानकारी देने में झिझक, किरायेदारों और अस्थायी निवासियों का रिकार्ड तैयार करना तथा ग्रामीण क्षेत्रों में कमजोर इंटरनेट नेटवर्क हो सकता है। डिजिटल तरीके से आंकड़े अपलोड करने में भी दिक्कत की आशंका है। इसके बावजूद पहले दिन के अनुभवों ने यह संकेत दे दिया कि जनगणना सिर्फ आंकड़ों का काम नहीं, बल्कि लोगों तक भरोसे के साथ पहुंचने की प्रक्रिया भी है।

