
बल्लभगढ़। अन्नदाता को अब की बार मौसम की मार से राहत नहीं मिल रही है। मार्च से लगातार बूंदाबांदी होने के कारण पहले तो रबी में गेहूं की फसल में भारी नुकसान उठाना पड़ा। अब कपास की फसल नहीं लगा पाए। इस वर्ष जहां कपास का रकबा बढ़ना चाहिए था, वह घट गया है। किसान इससे काफी परेशान हैं।
कपास की फसल को किसान जल संरक्षण करने के लिए लगाते हैं। इस फसल में पानी की आवश्यकता नहीं होती। यह नकदी फसल मानी जाती है। इसे बेचने से किसान को अच्छा पैसा मिलता है। पिछले वर्ष जिले में किसानों ने 900 एकड़ भूमि पर कपास की फसल लगाई थी। पिछले वर्ष वर्षा का मौसम अच्छा रहा था। इसके बावजूद कपास लगाने वाले किसानों को नुकसान नहीं हुआ था। वर्षा सितंबर के आखिर में बंद हो गई थी। किसानों को कपास का एक लोन मिला था।
इस लोन से किसानों को अच्छा मुनाफा हो गया था। किसानों ने कपास को मंडी में 11 से 13 हजार रुपये प्रति कुंतल बेचा था। कपास का अच्छा भाव मिलने के कारण किसान इस बार रकबा बढ़ाना चाहते थे। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने कपास को लेकर 1100 एकड़ का लक्ष्य तय किया था। इस बार वर्षा का मौसम लगातार होने से किसानों का बीज मर गया और कपास लगाने का मौका नहीं मिला। जिले में इस बार कपास मुश्किल से 200 से 250 एकड़ रकबा रह गया है।
मैंने पिछले वर्ष पांच एकड़ कपास लगाई थी। इस वर्ष वर्षा लगातार होने से कपास लगाने का समय ही नहीं मिला। एक दिन मौसम साफ होता, दूसरे दिन फिर से वर्षा हो जाती थी। इस तरह से कपास समय पर नहीं लगा पाए। अब फसल पछेती हो गई है।
-रणवीर सिंह, किसान
कपास को बोने का समय अप्रैल के शुरू से लेकर मई के शुरू तक का होता है। इसके बाद यदि कपास की फसल को लगाते हैं तो जब कपास खिलती है तो तब वर्षा से नुकसान की आशंका रहती है। वर्षा लगातार होने से रपड़ा होने से काफी बीज खराब हो गया।
-संदीप सिंह, किसान
किसान वर्षा के चलते इस बार कपास नहीं लगा पाए। इसकी वजह से धान का रकबा बढ़ जाएगा। क्योंकि किसान तो उन फसलों को बोते हैं, जिससे कुछ मुनाफा मिले। खरीफ की फसल में कपास या धान सबसे ज्यादा फायदे की हैं।
-डॉ. आनंद कुमार, क्षेत्रीय कृषि विकास अधिकारी कृषि एवं किसान कल्याण विभाग फरीदाबाद

