
यमुनानगर। दुर्घटना का हाट स्पाट बन चुके ताजेवाला से लालढांग हाईवे को सुधारने की कवायद शुरू हुई है। दस किमी लंबे इस हाईवे का नए सिरे से निर्माण कार्य होगा। बार-बार यहां से हाईवे टूट रहा है। चढ़ाई व ढलाने होने व हाईवे तंग होने के कारण यहां पर खतरा अधिक रहता है।
इसे राेकने के लिए क्रेश बैरियर लगाए जाएंगे। संकेतक लगाए जाएंगे। बरम को ठीक कराया जाएगा। बार-बार यह हाईवे न टूटे। इसके लिए भी ओवरले (सड़क पर कंक्रीट की एक और नई परत बिछाकर गुणवत्ता बनाना), ड्रेनेज व प्रोटेक्शन वर्क (सड़क के तटबंधों, ढलानों व कटाव को जल क्षति से बचाने के लिए किया जाने वाला कार्य) कराया जाएगा। इसके लिए टेंडर खुल गया है। एजेंसी के साथ एग्रीमेंट साइन होना है। 15 जून तक हाईवे पर कार्य शुरू हो जाएगा।
29 मई को लालढांग के पास मक्की से लदा ट्रक पलटने से ही एक ही परिवार के चार सदस्यों की मौत हो गई है। हालांकि नेशनल हाईवे अथारिटी आफ इंडिया (एनएचएआइ) इस दुर्घटना में तकनीकी व सड़क सुरक्षा खामियां होने से इन्कार कर रहा है। यह हाईवे दस किमी के वाइल्ड लाइफ एरिया में सिंगल लेन है।
इसका समाधान हाईवे को डबल लेन या फोर लेन किया जाना है लेकिन संरक्षित एरिया होने के कारण यहां पर यह व्यवस्था नहीं हो सकती। ऐसे में ही एनएचएआइ ने इसका यही समाधान निकाला है कि हाईवे बार-बार न टूटे। इसके लिए ही आइआइटी रोपड की सर्वे रिपोर्ट के आधार पर कार्य किया जाएगा।
23 करोड़ रुपये से होंगे कार्य
हाईवे पर जगह-जगह रेलिंग टूटी हुई हैं। बरम असमतल है। ऐसे में सबसे बड़ा खतरा दोपहिया वाहन चालक को रहता है। वह बराबर से निकल रहे भारी वाहन से बच नहीं पाता। अपने दोपहिया वाहन को नीचे भी उतार नहीं सकता, क्योंकि बरम असमतल होने से गिरने का खतरा रहता है।
इस एरिया में हाईवे ओवरले हैं। यानि ढलान है। इसमें यदि वाहन ओवरलोड है तो उसका ढलान या ऊंचाई पर जाते समय अनियंत्रित होने का खतरा बढ़ जाता है। कई बार इसी तरह से वाहन अनियंत्रित होकर पलटे हैं। इसके अलावा पहाड़ों से बहकर आने वाला पानी भी हाईवे को तोड़ रहा है।
हाईवे के किनारे की मिट्टी बहकर नीचे चली जाती है। जिससे सड़क कटने व रेलिंग लटक जाती है। इसके लिए ही एनएचएआइ ने नए सिरे से टेंडर लगाया। 23 करोड़ रुपये की लागत का यह टेंडर खुल चुका है।
मैनेजर रिषभ गोयल ने कहा कि ताजेवाला से लालढांग हाईवे पर होने वाले कार्य के लिए टेंडर खुल चुका है। 15 जून तक यह कार्य शुरू हो जाएगा। इसमें सड़क सुरक्षा से जुड़े सभी कार्य होंगे। सबसे जरूरी ओवरलोड वाहनों का आवागमन रोकना है। इसके लिए भी अधिकारियों को पत्र लिखा जाएगा।

