हरियाणा का सबसे मॉडर्न शहर पर बेटियों को लेकर सोच पुरानी, गुरुग्राम में Sex Ratio के आंकड़ों ने चौंकाया

गुरुग्राम। देश की साइबर सिटी और काॅरपोरेट हब के रूप में पहचान बना चुके गुरुग्राम में विकास की रफ्तार भले तेज हो, लेकिन बेटियों को लेकर सोच अब भी पुराने ढर्रे पर चलती दिखाई दे रही है।

जनवरी से अप्रैल 2026 तक के जन्म आंकड़ों ने एक बार फिर जिले की चिंताजनक तस्वीर सामने रख दी है। आधुनिकता और हाइटेक जीवनशैली के दावों के बीच बेटियों की संख्या लगातार लड़कों से पीछे बनी हुई है।

1000 लड़कों पर सिर्फ 862 लड़कियां का जन्म

सरकारी आंकड़ों के अनुसार चार महीनों में जिले में कुल 15625 बच्चों का जन्म दर्ज किया गया। इनमें 8391 लड़के और केवल 7234 लड़कियां शामिल हैं। यानी हर हजार लड़कों पर सिर्फ 862 लड़कियां जन्मीं। यह स्थिति ऐसे जिले में सामने आई है, जिसे हरियाणा का सबसे विकसित और शिक्षित इलाका माना जाता है।

सबसे अधिक चिंता शहरी क्षेत्रों को लेकर है। आंकड़ों की मानें तो अर्बन इलाके में 7522 लड़कों के मुकाबले केवल 6437 लड़कियों का जन्म हुआ और लिंगानुपात 856 दर्ज किया गया। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में 917 का लिंगानुपात दर्ज हुआ। यानी गांवों से ज्यादा माडर्न माने जाने वाले शहरों में बेटियों की स्थिति अधिक खराब मिली।

गुरुग्राम ब्लॉक की स्थिति भी बेहतर नहीं 

सोहना ब्लाॅक की सबसे फिसड्डी साबित हुआ। यहां 558 लड़कों के मुकाबले केवल 473 लड़कियां जन्मीं और लिंगानुपात 848 रहा। सोहना अर्बन क्षेत्र में यह आंकड़ा और गिरकर 834 तक पहुंच गया। गुरुग्राम ब्लाॅक की स्थिति भी ज्यादा बेहतर नहीं रही।

यहां 6715 लड़कों के मुकाबले 5723 लड़कियां जन्मीं और लिंगानुपात 852 दर्ज हुआ। पूर्व पीएमओ डाॅ. धर्म सिंह धनखड़ का मानना है कि आर्थिक विकास और ऊंची शिक्षा अपने आप सामाजिक सोच नहीं बदलते है।

जिले के ताजा आंकड़े इसी विरोधाभास को उजागर कर रहे हैं। शहर आधुनिक हो गया, लेकिन बेटियों को बराबरी देने की मानसिकता अब भी पूरी तरह आधुनिक नहीं बन सकी है।

जागरूकता अभियान और रैलियां शहरी आंकड़ों में बेअसर दिखीं

प्रशासन की ओर से लगातार बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान चलाए जा रहे हैं। स्कूलों, पंचायतों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में जागरूकता संदेश दिए जा रहे हैं।

पीसीपीएनडीटी एक्ट के तहत छापेमारी और कार्रवाई के दावे भी किए जाते हैं, लेकिन आंकड़े बता रहे हैं कि इन अभियानों का अपेक्षित असर अभी जमीन पर दिखाई नहीं दे रहा।

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