
चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने अनाधिकृत औद्योगिक कॉलोनियों के नियमितीकरण के लिए विशेष नीति को मंजूरी प्रदान की है। इसके अंतर्गत कम से कम 50 उद्यमी, जिनकी इकाइयां 10 एकड़ भूमि पर संचालित हैं, वे सामूहिक रूप से पोर्टल पर आवेदन कर राज्य सरकार की अनधिकृत औद्योगिक कॉलोनियों को नियमित कराने की योजना का लाभ हासिल कर सकते हैं। तीन अक्टूबर 2025 से पहले बनी समस्त अनधिकृत औद्योगिक कालोनियां नियमितीकरण के लिए पात्र होंगी। इनमें सड़क, बिजली और पानी समेत समस्त बुनियादी सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
कैबिनेट मीटिंग में लगी मुहर
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में सोमवार को हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में यह निर्णय लिया गया। बैठक में हरियाणा प्रबंधन नागरिक सुविधाएं एवं आधारभूत संरचना की कमी वाले क्षेत्र (विशेष प्रविधान) संशोधन अधिनियम 2025 के नये प्रविधानों को लागू करने को मंजूरी दी गई।
इस निर्णय का उद्देश्य राज्यभर में अनधिकृत औद्योगिक प्रतिष्ठानों के नियमितीकरण को सुगम बनाना तथा ऐसे क्षेत्रों में बुनियादी नागरिक सुविधाएं एवं आधारभूत संरचना उपलब्ध कराना है। इस निर्णय से राज्य में अनधिकृत औद्योगिक क्लस्टरों में संचालित हजारों औद्योगिक प्रतिष्ठानों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। साथ ही इससे योजनाबद्ध आधारभूत संरचना विकास, पर्यावरणीय अनुपालन तथा हरियाणा में औद्योगिक विकास को भी बढ़ावा मिलेगा।
हरियाणा सरकार ने नगरपालिकाओं की सीमा से बाहर स्थित आधारभूत संरचना एवं नागरिक सुविधाओं से वंचित क्षेत्रों में आवश्यक सेवाएं एवं सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से वर्ष 2021 में हरियाणा प्रबंधन नागरिक सुविधाएं एवं आधारभूत संरचना अभावग्रस्त क्षेत्र (विशेष प्रविधान) अधिनियम लागू किया था। इसके बाद 19 जुलाई 2022 को नीति अधिसूचित की गई तथा छह अप्रैल 2023 को राहत संबंधी निर्देश जारी किए गए। यह व्यवस्था औद्योगिक कालोनियों पर लागू नहीं होती थी।
अनाधिकृत औद्योगिक प्रतिष्ठानों को मिलेगा लाभ
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी द्वारा राज्य बजट के दौरान की गई घोषणा के अनुरूप सरकार ने यह निर्णय लिया कि अनधिकृत औद्योगिक प्रतिष्ठानों को भी इसी प्रकार का लाभ दिया जाए, ताकि ऐसे क्षेत्रों में बुनियादी ढांचा एवं नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।
इसी उद्देश्य से अधिनियम में संशोधन किए गए, जिन्हें तीन अक्टूबर 2025 को हरियाणा अधिनियम संख्या 22 (2025) के माध्यम से अधिसूचित किया गया। मंत्रिमंडल ने एक आनलाइन पोर्टल के निर्माण को भी मंजूरी दी है, जिसके माध्यम से उद्यमी या उनके अधिकृत प्रतिनिधि आधारभूत संरचना से वंचित औद्योगिक क्षेत्रों की घोषणा तथा औद्योगिक प्रतिष्ठानों के नियमितीकरण हेतु आवेदन कर सकेंगे।
शहरी निकायों में औद्योगिक प्लॉटों के उप विभाजन को मंजूर
हरियाणा सरकार ने नगरपालिका सीमा के अंदर औद्योगिक प्लाटों के नये उप विभाजन (डिवाइडेशन) तथा पहले से अवैध रूप से उप विभाजित औद्योगिक भूखंडों के नियमितीकरण की नीति को मंजूरी प्रदान की है। मंत्रिमंडल की बैठक में शहरी स्थानीय निकाय विभाग के इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई।
यह नीति उन औद्योगिक भूखंड मालिकों पर लागू होगी, जो नए उप-विभाजन की अनुमति प्राप्त करना चाहते हैं तथा उन औद्योगिक भूखंडों को नियमित करवाना चाहते हैं, जिन्हें पहले ही अवैध रूप से उप-विभाजित किया जा चुका है। ये भूखंड नगर पालिका सीमा के भीतर भारत सरकार के पुनर्वास मंत्रालय द्वारा विकसित पुनर्वास योजना क्षेत्रों में स्थित हैं।
नीति के अनुसार, मूल औद्योगिक भूखंड का न्यूनतम क्षेत्रफल एक एकड़ होना चाहिए तथा उसका संपर्क कम से कम 12 मीटर चौड़ी मौजूदा सड़क से होना आवश्यक है। प्रत्येक उप-विभाजित अथवा नये उप-विभाजित भूखंड का न्यूनतम आकार 500 वर्ग गज से कम नहीं होगा। इसके अतिरिक्त, सभी उप-विभाजित भूखंडों में हरियाणा बिल्डिंग कोड-2017 के प्रविधानों के अनुरूप परिसर के भीतर पार्किंग सुविधा उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा।
नये उप-विभाजन अथवा पहले से अवैध रूप से उप-विभाजित भूखंडों के नियमितीकरण के इच्छुक आवेदकों को अपना आवेदन संबंधित नगर निगम क्षेत्रों में आयुक्त, नगर निगम तथा नगर परिषद या नगर समिति क्षेत्रों में जिला नगर आयुक्त को प्रस्तुत करना होगा। आवेदन प्राप्त होने के बाद संबंधित प्राधिकारी निर्धारित नीति मानकों के अनुसार मामले की जांच करेगा और आवेदन प्राप्ति की तिथि से 60 दिनों के भीतर निर्णय लेगा।
डेयरी फार्मिंग के लिए स्वयं सहायता समूहों को पट्टे पर मिलेगी शामलाती जमीन
हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक में डेयरी फार्मिंग के प्रोत्साहन के लिए स्वयं सहायता समूहों को शामलात देह की जमीन पट्टे पर देने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की गई। विकास एवं पंचायत विभाग के इस प्रस्ताव के अंतर्गत हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के साथ पंजीकृत स्वयं सहायता समूहों को डेयरी फार्मिंग के उद्देश्य से ”शामलात देह” (सामुदायिक) भूमि उपलब्ध कराई जाएगी।
इस उद्देश्य के लिए कैबिनेट ने ”हरियाणा ग्राम सांझी भूमि (विनियमन) नियम 1964” के नियम छह में संशोधन को संबंधित नियमों और शर्तों के साथ मंजूरी दी है। डेयरी स्थापित करने के लिए 500 वर्ग गज तक की ”शामलात देह” भूमि पट्टे पर देने की अनुमति रहेगी। यह पट्टा शुरू में पांच साल की अवधि के लिए दिया जाएगा और डेयरी के संतोषजनक संचालन के आधार पर इसे और तीन साल के लिए बढ़ाया जा सकता है। पट्टे की अवधि बढ़ाने के लिए संबंधित उपायुक्त की पूर्व मंजूरी अनिवार्य होगी।
उपायुक्त ही ग्राम पंचायतों को ऐसी भूमि पट्टे पर देने के लिए मंजूरी प्रदान करने हेतु सक्षम प्राधिकारी होंगे। स्वयं सहायता समूहों के सदस्यों का उसी गांव या ग्राम पंचायत का निवासी होना जरूरी होगा।

