हाई कोर्ट के आदेश पर गुरुग्राम के DLF में बड़ी तोड़फोड़, 5099 संपत्तियों को नोटिस; कई अवैध PG और होटल सील

नया गुरुग्राम। पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के आदेशों के पालन में टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग (डीटीपीई) ने बृहस्पतिवार को डीएलएफ फेज-3 में अवैध निर्माणों और रिहायशी मकानों में संचालित अवैध व्यावसायिक गतिविधियों के विरुद्ध बड़े स्तर पर सीलिंग एवं रेस्टोरेशन अभियान शुरू कर दिया।

दोपहर करीब 12 बजे जिला नगर योजनाकार एन्फ़ोर्समेंट (डीटीपीई) अमित मधोलिया के नेतृत्व में पुलिस, महिला पुलिसकर्मियों और जिला प्रशासन की मौजूदगी में एस-ब्क, नाथूपुर रोड से कार्रवाई शुरू की गई।

डीएलएफ इलाके में पहली बार टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग की ओर से इतने बड़े स्तर पर सीलिंग और तोड़फोड़ की कार्रवाई शुरू की गई है। अभियान शुरू होते ही डीएलएफ फेज-एक से फेज-चार तक के निवासियों में हड़कंप मच गया।

5099 प्रॉपर्टीज को जारी किए गए नोटिस 

विभाग के रिकाॅर्ड के अनुसार डीएलएफ के विभिन्न फेजों में 5099 संपत्तियों को नोटिस जारी किए जा चुके हैं। इन संपत्तियों में रिहायशी मकानों में अवैध निर्माण, स्टिल्ट पार्किंग पर कब्जे और अवैध व्यावसायिक गतिविधियों के संचालन के आरोप हैं।

कार्रवाई के दौरान प्लाॅट नंबर नाथूपुर रोड पांच पर संचालित अवैध होटल मूनलाइट को सील किया गया, जबकि नाथूपुर रोड 45 स्थित अवैध अस्पताल द मेडिसिटी को भी सील कर दिया गया। नाथूपुर रोड 2 पर संचालित अवैध कार्यालय को भी विभाग ने बंद करा दिया।

सबसे बड़ी कार्रवाई एस-23/1 स्थित अमलतास अपार्टमेंट्स पर हुई, जहां 48 कमरों की अवैध इमारत को सील किया गया। बेसमेंट और स्टिल्ट सहित पांच मंजिलों में बने 48 वन-बेडरूम सेटों में बड़ी संख्या में लोग रह रहे थे।

विरोध का भी सामना करना पड़ा 

कार्रवाई के दौरान भवन खाली कराने का विरोध भी हुआ। भवन मालिक ने दावा किया कि उसे कोई नोटिस नहीं दिया गया था। इमारत में वरिष्ठ नागरिक भी रह रहे थे, लेकिन विभागीय टीम ने मौके पर ही भवन खाली कराकर उसे सील कर दिया। निवासियों का आरोप था कि उन्हें सामान हटाने या वैकल्पिक व्यवस्था करने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया गया।

इसी प्रकार एस-24/1 में संचालित एक पीजी में रह रही लड़कियों को बाहर निकलवाने के बाद इमारत को सील किया गया। यहां बेसमेंट में संचालित ब्यूटी पार्लर तथा ऊपरी मंजिलों पर बने 25 कमरों वाले पीजी को बंद कराया गया।

एस-24/9 पर चार मंजिलों में संचालित अवैध पीजी को भी सील किया गया। इस भवन में प्रत्येक मंजिल पर 18 कमरे बने हुए थे और कुल 72 कमरों का संचालन किया जा रहा था। नाथूपुर रोड 38 स्थित प्रिस्टिन केयर क्लिनिक द्वारा साइड सेटबैक में किए गए अतिक्रमण को जेसीबी से हटाया गया।

पार्किंग में बने ऑफिस तोड़े गए 

वहीं एस-23/5 पर स्टिल्ट पार्किंग में बनाए गए अवैध कार्यालय को ध्वस्त किया गया। विभागीय अधिकारियों के अनुसार डीएलएफ में पहली बार स्टिल्ट क्षेत्र के अंदर जेसीबी मशीन ले जाकर अवैध निर्माण तोड़ा गया।

एस-24/3 में स्टिल्ट फ्लोर पर बनाए गए ड्राइंग रूम और कवर किए गए रियर सेटबैक को सील किया गया। एस-24/4 में बने छह अवैध घरेलू सहायक रूम और एक लीजर रूम को सील किया गया जबकि एस-24/5 में बने पांच घरेलू सहायक कमरों पर भी विभाग ने ताला लगा दिया।

एस-25/1 पर स्टिल्ट फ्लोर में संचालित बुटीक को ध्वस्त किया गया तथा पीछे के सेटबैक में बनाई गई शेड को जेसीबी से हटाया गया। यहां स्टिल्ट फ्लोर पर बने छह तथा टैरेस पर बने तीन अवैध क्वार्टरों को सील किया गया।

साथ ही अवैध एंट्री रैंप भी तोड़ दिए गए। एस-25/8 में बने पांच सर्वेंट क्वार्टर तथा स्टिल्ट में संचालित इंटीरियर डिजाइनर कार्यालय को भी सील किया गया।

अभियान के दौरान राइट ऑफ वे (आरओडब्ल्यू) अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई भी की गई। दो प्लाटों के सामने लगाए गए अवैध ग्रिल हटाए गए तथा चार गार्ड रूम ध्वस्त कर सार्वजनिक मार्ग को अतिक्रमण मुक्त कराया गया।

फरवरी 2025 से शुरू हुई कानूनी लड़ाई

डीएलएफ इलाके में कार्रवाई के लिए पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने सबसे पहले फरवरी 2025 में आदेश जारी किए थे। इसके बाद अप्रैल 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने कार्रवाई पर रोक लगा दी थी। बाद में नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने मामला पुनः उच्च न्यायालय को भेजते हुए सभी पक्षों की सुनवाई कर नए सिरे से आदेश पारित करने को कहा।

विस्तृत सुनवाई के बाद मई 2026 में उच्च न्यायालय ने फिर से कार्रवाई शुरू करने के आदेश जारी कर दिए। हालांकि कुछ मामलों में अभी भी सुनवाई जारी है और उनकी अगली सुनवाई छह जुलाई को निर्धारित है।

जिला अदालत से भी नहीं मिल रही राहत

विभागीय कार्रवाई शुरू होने के बाद प्रभावित लोगों ने दोबारा जिला अदालत का दरवाजा खटखटाना शुरू कर दिया है। हालांकि अब तक ऐसे मामलों में लोगों को राहत नहीं मिली है।

पिछले दो से तीन दिनों के दौरान दायर किए गए तीन मामलों में अदालत ने अंतरिम राहत देने से इंकार कर दिया है। इसके बाद विभाग ने अपनी कार्रवाई और तेज कर दी है।

उच्च न्यायालय के आदेशों की अनुपालना सुनिश्चित करने के लिए यह अभियान लगातार जारी रहेगा। अवैध निर्माणों, अवैध व्यावसायिक गतिविधियों और अतिक्रमणों के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी तथा सरकारी कार्य में बाधा डालने वालों के विरुद्ध एफआइआर भी दर्ज कराई जाएगी।

– अमित मधोलिया, डीटीपीई, टाउन प्लानिंग

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top