
हजारीबाग। जिला स्वास्थ्य विभाग में जैम पोर्टल के माध्यम से खरीदारी में बड़े घोटाले का मामला सामने आया है, जिसने विभागीय कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 17 लाख रुपये के ऑर्डर के विरुद्ध महज करीब 8 लाख रुपये की सामग्री की आपूर्ति हुई, जबकि शेष 9 लाख रुपये के सामान का अब तक कोई अता-पता नहीं है।
इससे भी अधिक चौंकाने वाली बात यह है कि गायब सामग्री के बदले संबंधित कर्मियों द्वारा एजेंसी से नकद राशि लेने का आरोप सामने आया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए सिविल सर्जन डॉ अशोक कुमार की मॉनिटरिंग में डीवीबीडी डॉ कपिल मुनि प्रसाद की अगुवाई में तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित की गई है।
इसमें जिला आरसीएच पदाधिकारी डॉ सुभाष प्रसाद और जिला लेखा प्रबंधक अनल कुजूर शामिल हैं। यह कमेटी वर्ष 2023 से अब तक जैम पोर्टल के जरिए हुई सभी खरीद की भौतिक जांच करेगी।
मामले को लेकर कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार भंडारपाल सह लिपिक की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है। आरोप है कि एक वर्ष तक सामग्री की आपूर्ति हुई या नहीं, इसकी कोई प्रविष्टि नहीं की गई और न ही इसकी सूचना वरीय अधिकारियों को दी गई। मामला उजागर होने पर जिम्मेदारी दूसरे लिपिक पर डालने का प्रयास किया गया, जबकि पूरी जवाबदेही भंडारपाल की होती है।
15 दिन के अंदर बाकी सामान उपलब्ध कराने का अल्टीमेटम
बता दें कि घोटाले का खुलासा तब हुआ जब सिविल सर्जन डॉ अशोक कुमार व जिला कुष्ठ निवारण पदाधिकारी डॉ एस के राजन फील्ड विजिट के दौरान विभिन्न सीएचसी और पीएचसी में हेल्थ कार्ड और फोल्डर नहीं पाए।
पूछताछ में स्पष्ट हुआ कि सामग्री की आपूर्ति ही नहीं हुई है, जबकि मार्च 2025 में इसके लिए भुगतान किया जा चुका था। इसके बाद सिविल सर्जन ने मामले का संज्ञान लेकर मामले की जांच का आदेश दिया।
जांच शुरू होते ही गड़बड़ी की परतें खुलने लगी है। विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार 2,06,000 हेल्थ कार्ड और 50,000 फैमिली फोल्डर का ऑर्डर दिया गया था, लेकिन आपूर्ति बेहद कम मात्रा में हुई। शेष सामग्री के बदले नकद लेनदेन की बात सामने आने से मामला और गंभीर हो गया है।
सिविल सर्जन डॉ अशोक कुमार ने एजेंसी को 15 दिनों के भीतर शेष सामग्री उपलब्ध कराने का अल्टीमेटम दिया है। तय समय में आपूर्ति नहीं होने पर एफआईआर दर्ज करने की चेतावनी दी गई है। साथ ही इस पूरे मामले में संलिप्त सभी कर्मियों पर सख्त कार्रवाई के संकेत दिए गए हैं।

