
पश्चिमी दिल्ली। दिल्ली की जेलों में अब कैदियों के पार्सल को लेकर जेल प्रशासन की मनमानी और प्रक्रिया में होने वाली अनियमितताओं पर पूरी तरह लगाम लग जाएगी।
जेल मुख्यालय ने एक बेहद सख्त और व्यापक सर्कुलर जारी कर स्पष्ट कर दिया है कि पार्सल की जांच और वितरण में अब किसी भी स्तर पर पारदर्शिता से समझौता नहीं होगा।
नए दिशा-निर्देशों का सीधा संदेश है कि पार्सल रोकना या उसमें देरी करना अब स्टाफ की मर्जी का खेल नहीं, बल्कि जवाबदेही का हिस्सा होगा।
क्यों पड़ी इस नए आदेश की जरूरत?
जेल प्रशासन के संज्ञान में समय-समय पर ऐसी बातें आती रही हैं जहां पार्सल प्राप्त करने की प्रक्रिया में देरी या अस्पष्टता के कारण कैदियों और उनके स्वजन को असुविधा का सामना करना पड़ता था। कई बार सुरक्षा जांच के नाम पर पार्सल लंबे समय तक लंबित रहते थे।
ये हैं एसओपी की मुख्य बातें
- अब पार्सल केवल निचले स्तर के कर्मियों द्वारा नहीं जांचे जाएंगे। डिप्टी सुपरिटेंडेंट स्तर के अधिकारी की व्यक्तिगत मौजूदगी में ही पार्सल खोला जाएगा। इससे जांच की विश्वसनीयता बढ़ेगी।
- जेल के वेलफेयर ऑफिसर को जिम्मेदारी दी गई है कि वे हर हफ्ते पार्सल रजिस्टर की जांच करें। उन्हें यह रिपोर्ट देनी होगी कि किसी भी कैदी को उसके सामाजिक या आर्थिक आधार पर पार्सल सुविधा से वंचित तो नहीं किया जा रहा।
- यदि किसी पार्सल को सुरक्षा कारणों से अस्वीकार किया जाता है या उसमें देरी होती है, तो जेल अधीक्षक को इसका ठोस कारण लिखित में दर्ज करना होगा। अब मौखिक आदेशों पर पार्सल नहीं रोके जा सकेंगे।
- यदि पार्सल में कोई भी प्रतिबंधित वस्तु (जैसे तंबाकू, ड्रग्स या इलेक्ट्राॅनिक्स) पाई जाती है, तो उसे तुरंत जब्त कर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। ड्रग्स के संदेह की स्थिति में पार्सल का अनिवार्य रूप से एक्सरे स्कैन कराया जाएगा।
प्राॅपर्टी रजिस्टर में होगी एंट्री
पारदर्शिता बढ़ाने के लिए प्रशासन ने आदेश दिया है कि पार्सल में आने वाली हर छोटी-बड़ी वस्तु का विवरण कैदी संपत्ति रजिस्टर (प्रिजनर्स प्राॅपर्टी रिजस्टर) में दर्ज किया जाएगा।
इससे सामान के गायब होने या बदलने की गुंजाइश खत्म हो जाएगी। जेल प्रशासन ने यह स्पष्ट किया है कि इन दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करने वाले किसी भी जेल कर्मचारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

