
गुरुग्राम। साइबर सिटी में बढ़ती पेयजल मांग को देखते हुए गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (जीएमडीए) ने चंदू-बुढ़ेड़ा वाटर ट्रीटमेंट प्लांट की नई सौ एमएलडी क्षमता वाली पांचवीं यूनिट को जून में चालू करने की तैयारी पूरी कर ली है।
यूनिट का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है और अब केवल बिजली कनेक्शन का कार्य शेष है। हालांकि, इस नई यूनिट के संचालन के लिए अतिरिक्त नहरी पानी की उपलब्धता सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है, क्योंकि गुरुग्राम वाटर सप्लाई (जीडब्ल्यूएस) चैनल की हालत जर्जर है और इसकी क्षमता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
नई यूनिट को चालू करने के लिए जीएमडीए को सिंचाई विभाग से करीब 45 क्यूसेक अतिरिक्त नहरी पानी की आवश्यकता होगी। इस संबंध में जीएमडीए कई बार सिंचाई विभाग को पत्र लिख चुका है।
जीएमडीए के एक्सईएन अभिनव वर्मा ने बताया कि अतिरिक्त पानी उपलब्ध कराने के लिए लगातार विभागीय स्तर पर पत्राचार किया जा रहा है। वहीं सिंचाई विभाग के एक्सईएन रविंद्र कुमार का कहना है कि नहर की मौजूदा क्षमता और जल आपूर्ति की स्थिति का आकलन करने के बाद ही कोई निर्णय लिया जाएगा। फिलहाल इस विषय पर अंतिम स्थिति स्पष्ट नहीं है।
जर्जर जीडब्ल्यूएस से आपूर्ति पर संकट
गुरुग्राम वाटर सप्लाई चैनल का निर्माण 90 के दशक में किया गया था। समय के साथ यह चैनल काफी जर्जर हो चुका है। अधिकारियों के अनुसार यदि क्षमता से अधिक पानी छोड़ा गया तो चैनल के टूटने का खतरा बढ़ सकता है, जिससे जलापूर्ति व्यवस्था प्रभावित होने के साथ आसपास के क्षेत्रों में नुकसान भी हो सकता है।
जीडब्ल्यूएस रीमॉडलिंग की योजना, फिलहाल काम शुरू नहीं
जीडब्ल्यूएस की खराब स्थिति को देखते हुए इसके रीमाॅडलिंग की योजना तैयार की गई है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार जल्द ही इस योजना पर काम शुरू किया जाएगा ताकि भविष्य में बढ़ती जल मांग के अनुसार चैनल को मजबूत किया जा सके। वर्तमान में पुराने चैनल पर अधिक दबाव पड़ रहा है।
175 क्यूसेक है जीडब्ल्यूएस की क्षमता
सोनीपत के ककरोई हेड से लगभग 70 किलोमीटर दूर तक कच्चा नहरी पानी बसई प्लांट तक पहुंचाया जाता है। ककराेई से दो मुख्य चैनल निकलते हैं, जिनमें जीडब्ल्यूएस और एनसीआर चैनल शामिल हैं।
जीडब्ल्यूएस चैनल वाया झज्जर गुरुग्राम तक आता है, लेकिन झज्जर से गुरुग्राम के बीच इसका बड़ा हिस्सा जर्जर स्थिति में पहुंच चुका है। दूसरी ओर एनसीआर चैनल बहादुरगढ़ के रास्ते गुरुग्राम तक बना हुआ है। दोनों चैनलों के माध्यम से चंदू-बुढ़ेड़ा और बसई वाटर ट्रीटमेंट प्लांट तक करीब 270 क्यूसेक नहरी पानी पहुंचाया जा रहा है।
गर्मी में बढ़ जाती है 700 एमएलडी से अधिक मांग
वर्तमान में चंदू-बुढ़ेड़ा और बसई प्लांट मिलकर गुरुग्राम को करीब 670 एमएलडी नहरी पेयजल उपलब्ध करा रहे हैं। लेकिन तेजी से बढ़ती आबादी और निर्माण गतिविधियों के कारण गर्मियों में पानी की मांग 700 एमएलडी से अधिक पहुंच जाती है।
इसके चलते कई सेक्टरों और अंतिम छोर वाले इलाकों में जल संकट गहरा जाता है। इन दिनों भी मांग लगभग 730 एमएलडी के करीब बनी हुई है। इस कमी को पूरा करने के लिए बोरवेल और टैंकरों का सहारा लेना पड़ रहा है।

