आग में जले रिकॉर्ड रिकंस्ट्रक्ट करने की बड़ी चुनौती, गुरुग्राम कोर्ट कैसे जुटाएगा 1975 से लेकर अब तक की फाइलें?

गुरुग्राम। जिला अदालत के रिकाॅर्ड रूम में आग लगने के बाद 51 वर्षों के न्यायिक रिकाॅर्ड को दोबारा तैयार करने की चुनौती सामने खड़ी हो गई है। हालांकि वरिष्ठ अधिवक्ताओं का मानना है कि यह कार्य कठिन जरूर है।

लेकिन सभी पक्षों के सहयोग से रिकाॅर्ड को रिकंस्ट्रक्ट किया जा सकता है। अदालत प्रशासन ने भी जले हुए रिकाॅर्ड को पुनर्निर्मित करने के निर्देश जारी कर दिए हैं।

अदालत परिसर का निर्माण 1975 में किया गया था। 1975 से पहले जिला अदालत सिविल लाइन में चलती थी। 1975 से अभी तक का सभी डिसाइड केस का रिकाॅर्ड इसमें रखा था। निचली अदालत और सेशन अदालत के रिकार्ड रूम आमने-सामने हैं। बताया जा रहा है कि सेशन अदालत का रिकाॅर्ड रूम सुरक्षित है।

अधिकांश मामलों की प्रतियां संबंधित अधिवक्ताओं के पास उपलब्ध रहती हैं। इसके अलावा जिन मामलों का फैसला निचली अदालतों में हो चुका है और जिन्हें सत्र अदालत में चुनौती दी गई है। उनका रिकाॅर्ड वहां सुरक्षित रहता है। कई मामलों का रिकाॅर्ड हाईकोर्ट तक भी पहुंचा हुआ है। जिससे दस्तावेज जुटाने में मदद मिलेगी।

 रतन सिंह राघव, एडवाेकेट एवं पूर्व अध्यक्ष, जिला बार एसोसिएश

पुराने मामलों को दोबारा व्यवस्थित करना समय लेने वाला काम है। लेकिन आधुनिक तकनीक और डिजिटल माध्यमों से प्रक्रिया को आसान बनाया जा सकता है। बार और बेंच मिलकर काम करें तो रिकाॅर्ड पुनर्निर्माण संभव है। वैसे 2015 के बाद तो सारा रिकाॅर्ड ऑनलाइन है। पुराने रिकाॅर्ड की विशेष परिस्थितियों में ही जरूरत होती है।

– एसएस चौहान, एडवोकेट एवं पूर्व अध्यक्ष, जिला बार एसोसिएशन

अदालतों में पेश होने वाले दस्तावेजों की प्रतियां पक्षकारों और वकीलों दोनों के पास रहती हैं। ऐसे में महत्वपूर्ण फाइलों को दोबारा तैयार किया जा सकता है। सबसे ज्यादा चुनौती बहुत पुराने मामलों में आएगी। जहां दस्तावेज सीमित उपलब्ध होंगे। पुरानी फाइलें रखने के लिए अधिवक्ताओं के पास भी इतने बड़े रिकाॅर्ड रूम उपलब्ध नहीं होते।

– मीर सिंह यादव, पूर्व अध्यक्ष, जिला बार एसोसिएशन

यह केवल अदालत प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरी न्यायिक व्यवस्था की सामूहिक जिम्मेदारी है। यदि अधिवक्ता, पक्षकार और अदालत कर्मचारी समन्वय के साथ कार्य करें तो जले हुए रिकाॅर्ड का बड़ा हिस्सा दोबारा तैयार किया जा सकता है। जले हुए रिकाॅर्ड को रिकंस्ट्रक्ट करना चुनौती भरा काम तो है लेकिन कठिन नहीं है। जिला बार एसोसिएशन रिकार्ड को रिकंस्ट्रक्ट करने में पूरा सहयोग करेगी

– राहुल धनखड़, सचिव, जिला बार एसोसिएशन

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