
गुरुग्राम। साइबर सिटी की रैपिड मेट्रो सेवा ठप न हो, इसके लिए हरियाणा विद्युत प्रसारण निगम (HVPN) की ओर से तैयार एक्शन प्लान पर 28 मई से काम शुरू हो जाएगा। काम शुरू करने के लिए इंडियन ऑयल काॅरपोरेशन लिमिटेड (IOCL) ने सोमवार को अपनी सहमति दे दी। आ
IOCL की सहमति इसलिए आवश्यक थी, क्योंकि सेक्टर-65 इलाके से गैस पाइपलाइन भूमिगत गुजर रही है। कुछ जगह गैस पाइपलाइन के ऊपर से तारें गुजरेंगी। इसे ध्यान में रखकर कंपनी सुरक्षात्मक उपाय करेगी।
40 मिनट तक ठप रही थी मेट्रो
पिछले सप्ताह शुक्रवार रात लगभग आठ बजे सेक्टर-72 स्थित 220 केवी सब स्टेशन में फॉल्ट आने से रैपिड मेट्रो सेवा लगभग 40 मिनट तक ठप रही थी। रैपिड मेट्रो को सेक्टर-56 स्थित 220 केवी सब-स्टेशन से बिजली मिलती है।
सेक्टर-56 सब-स्टेशन को सेक्टर-72 सब-स्टेशन से बिजली मिलती है। सेक्टर-72 सब-स्टेशन को पावर ग्रिड के 400 केवी सब-स्टेशन से बिजली मिलती है। इस तरह एक ही मेन सोर्स होने की वजह से बिजली आपूर्ति शुरू करने में काफी समय लग गया।
यदि दूसरा सोर्स होता तो अधिक से अधिक पांच मिनट के भीतर सेवा सुचारू हो जाती। ऐसी स्थिति आगे न सामने आए, इसे ध्यान में रखकर एक अन्य सोर्स विकसित करने का काम 28 मई से शुरू हो जाएगा।
दो सब स्टेशनों को अब आपस में जोड़ा जाएगा
कादरपुर स्थित 400 केवी सब स्टेशन से सेक्टर-65 स्थित 220 केवी सब-स्टेशन को बिजली मिलती है। एक्शन प्लान के तहत सेक्टर-65 स्थित 220 केवी सब-स्टेशन से सेक्टर-56 स्थित 220 केवी सब-स्टेशन को जोड़ा जाएगा।
इसके जुड़ते ही रैपिड मेट्रो के लिए दो सोर्स हो जाएंगे। शुक्रवार रात की घटना के बाद शनिवार को ही न केवल एक्शन प्लान बनाया गया बल्कि उसपर काम शुरू करने के लिए आइओसीएल से सहमति लेने के प्रयास तेज कर दिए गए।
28 मई से योजना पर काम होगा शुरू
सोमवार दोपहर आईओसीएल ने एचवीपीएन को तारें बिछाने की सहमति दे दी। जिस कंपनी को तारें बिछाने का काम करना है, वह 28 मई से काम शुरू कर देगी।
एचवीपीएन के कार्यकारी अभियंता अनिल मलिक का कहना है कि 28 मई से हर हाल में तारें बिछाने का काम शुरू हो जाएगा। 15 जून तक दूसरा सोर्स तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है लेकिन प्रयास है कि 10 जून से पहले ही काम पूरा हो जाए।
दिल्ली मेट्रो को कई सोर्स से मिली है बिजली
काम शुरू होने के बाद कहीं भी बाधा न आए, इसके लिए पूरी तैयारी की जाएगी। बता दें कि दिल्ली मेट्रो को कई सोर्स से बिजली मिलती है। इस वजह से किसी भी सोर्स के फेल होने पर सेवा अधिक से अधिक पांच मिनट प्रभावित रहती है।
पांच मिनट इसलिए प्रभावित रहती है क्योंकि दूसरे सोर्स से बिजली चालू करने में इतने समय लग जाते हैं। रैपिड मेट्रो के लिए भी शुरू से ही कम से कम दो मेन सोर्स होने चाहिए थे, इसके ऊपर कभी ध्यान ही नहीं दिया गया।

