
गुरुग्राम। विदेशी साइबर सिडिंकेट भारत में ठगी का जाल धीरे-धीरे फैलाते जा रहे हैं। भारतीय पुलिस एक गिरोह को पकड़ती है तो दूसरा गिरोह कुछ दिन बाद सामने आ जाता है। फिलींपीस, कंबोडिया के बाद अब साइबर ठगी के लिए इजरायल कनेक्शन सामने आया है।
इजरायल के सिंडिकेट ने दुबई में काम करने वाली भारतीय महिला के जरिए गुरुग्राम में फर्जी कॉल सेंटर का सेटअप तैयार किया और हजारों लोगों को धोखाधड़ी का शिकार बनाया। साइबर पुलिस ने महिला व काल सेंटर के संचालक को मंगलवार को पूछताछ के बाद गुरुग्राम से गिरफ्तार कर लिया।
इजरायल सिंडिकेट ने ठगी के लिए गुरुग्राम में सिम बाक्स का सेटअप लगाया था। सेक्टर 65 के एमराल्ड प्लाजा में दो अप्रैल को छापेमारी कर साइबर पुलिस ने चार सिम बाक्स को बरामद किया था। उस दौरान दो सिम बाक्स चलते पाए गए थे और दो बंद पड़े थे।
हालांकि, छापेमारी से पहले ही आरोपित यहां से फरार हो चुके थे। इस एक सिम बाक्स में 72 सिम पड़े हुए थे। इनके माध्यम से विदेश से आने वाली काल गेटवे से भारतीय नंबरों में बदलकर लोगों को जा रही थी। झज्जर के दरियापुर गांव निवासी आरोपित मनोज यहां पर फर्जी काल सेंटर का संचालन कर रहा था।
छापेमारी के दौरान आरोपित की पहचान की गई थी। वहीं जांच के दौरान यह भी पता चला कि झज्जर की ही एक महिला तमन्ना ने इस काम में उसकी मदद की। साइबर थाना दक्षिण पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दोनों को मंगलवार को गिरफ्तार कर लिया।
तमन्ना दुबई में करती थी काम, इजराइल सिंडिकेट के संपर्क में आई
साइबर पुलिस के अनुसार पूछताछ में पता चला कि आरोपित तमन्ना चार साल पहले स्टडी वीजा पर दुबई गई थी। बैचलर की डिग्री हासिल करने के बाद वह वहीं की निजी कंपनी में काम करने लगी। करीब पांच महीने पहले उसकी मुलाकात इजरायल के एक युवक से हुई। उसने तमन्ना को गुरुग्राम में कॉल सेंटर का सेटअप बनाने का काम सौंपा।
इसके लिए उसने सात लाख रुपये दिए। तमन्ना एक अन्य दोस्त के माध्यम से मनोज के संपर्क में आई। मनोज ने फरवरी में टिकल एआइ नाम से कंपनी तैयार की और मार्च के पहले सप्ताह में सेंटर शुरू किया। ये सिम बाक्स नोएडा में बनवाए गए थे। इन्हें नोएडा से खरीदकर लाया गया।
इजरायल और भारत के लोगों के बीच सारा लेनदेन तमन्ना के खाते से किया गया। तमन्ना बीच-बीच में भारत आती रहती थी। अभी कुछ दिन पहले ही वह भारत आई थी। प्रारंभिक पूछताछ में यह भी पता चला कि विदेश में बैठे ठगों ने निवेश और डिजिटल अरेस्ट के माध्यम से लोगों को धोखाधड़ी का शिकार बनाया। एक सिम बाक्स के माध्यम से हर दिन 72 हजार फोन काल भारतीय लोगों को किए जा रहे थे।
प्रतिबिंब एप पर शिकायत के बाद पुलिस ने की थी कार्रवाई
साइबर थाना पुलिस ने बताया कि मार्च के अंतिम सप्ताह में प्रतिबिंब एप पर धोखाधड़ी की करीब 21 शिकायतें दर्ज की गईं। इन शिकायतों पर तकनीकी जांच करते हुए एमराल्ड प्लाजा में छापेमारी की गई थी। दोनों आरोपित को रिमांड पर लेकर पूछताछ की जाएगी। इनके माध्यम से गिरोह के अन्य साथियों के बारे में भी जानकारी मिल सकती है। बता दें कि दो महीने पहले फिलिपींस और कंबोडिया सिंडिकेट द्वारा भी ऐसे ही सिम बॉक्स का सेटअप डीएलएफ फेस तीन के कई जगहों पर किया गया था।

