
गुरुग्राम। मानसून के दौरान साइबर सिटी को डूबने से बचाने के लिए प्रशासन ने पूरी ताकत झोंक दी है। इसी दिशा में रविवार को गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (जीएमडीए) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (जीएमडीए) पीसी मीणा ने विभिन्न जल निकासी परियोजनाओं तथा जलभराव संभावित स्थलों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने अधिकारियों को सभी कार्य निर्धारित समयसीमा के भीतर पूर्ण करने तथा मानसून अवधि में जल निकासी व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के निर्देश दिए।
प्रमुख ड्रेनेज परियोजनाओं का फील्ड निरीक्षण
सीईओ ने वाटिका चौक से राष्ट्रीय राजमार्ग-48 के समानांतर निर्मित की जा रही लगभग 4.5 किलोमीटर लंबी लेग-4 ड्रेन का निरीक्षण किया। यह ड्रेन लगभग नौ मीटर चौड़ी, तीन मीटर गहरी तथा 1400 क्यूसेक वहन क्षमता वाली है। मौके पर मौजूद अधिकारियों ने बताया कि लगभग छह महीने पूर्व इस परियोजना का 75 प्रतिशत कार्य शेष था, जिसे निरंतर निगरानी और त्वरित कार्यवाही के माध्यम से लगभग पूरा कर लिया गया है।
वर्तमान में केवल लगभग 120 मीटर का कार्य शेष है, जिसे 15 जून तक पूरा कर लिया जाएगा। लेग-चार के संचालन में आने के बाद लेग-तीन (बादशाहपुर ड्रेन) पर पड़ने वाला दबाव कम होगा। अतिरिक्त वर्षा जल को आवश्यकता अनुसार गेट प्रणाली के माध्यम से लेग-चार की ओर मोड़ा जा सकेगा।
कब तक पूरा होगा काम?
इससे बादशाहपुर ड्रेन से जुड़े जलभराव प्रभावित क्षेत्रों में जल निकासी क्षमता में वृद्धि होगी और वर्षा जल का त्वरित निस्तारण सुनिश्चित किया जा सकेगा। इसके बाद सीईओ ने ताऊ देवीलाल स्टेडियम के नजदीक निर्माणाधीन ड्रेन का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने बताया कि यह कार्य 15 जून तक पूरा होने की संभावना है।
इससे मेदांता अस्पताल रोड व आसपास के अंडरपासों तथा सेक्टर-32 क्षेत्र में जलभराव की समस्या में कमी आएगी। नरसिंहपुर क्षेत्र में चल रहे जल निकासी कार्यों का भी जायजा लिया। अधिकारियों ने जानकारी दी कि एक नई ड्रेन के माध्यम से राष्ट्रीय राजमार्ग के समीप एकत्र होने वाले वर्षा जल को खांडसा गांव के बाहरी क्षेत्र से सीधे लेग-तीन तक पहुंचाया जाएगा।
इससे पानी को हीरो होंडा चौक की दिशा में ले जाने की आवश्यकता नहीं रहेगी। सनबीम फैक्ट्री के निकट ट्रेंचलेस तकनीक से निर्मित किए जा रहे बैरल तथा नई ड्रेन के माध्यम से जल निकासी व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा।
यह परियोजना एक्सप्रेसवे तथा सर्विस रोड के दोनों ओर जल निकासी को सुदृढ़ बनाएगी और नरसिंहपुर क्षेत्र में जलभराव की समस्या को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। मीणा ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी ड्रेनों की एंड-टू-एंड कनेक्टिविटी, सफाई तथा निर्बाध जल प्रवाह सुनिश्चित किया जाए, ताकि मानसून के दौरान नागरिकों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
मानेसर ड्रेन से जोड़ने के कार्यों का भी किया निरीक्षण
सेक्टर 37डी में जीएमडीए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने लेग-तीन एवं लेग-चार मास्टर ड्रेनों को मानेसर ड्रेन से जोड़ने के लिए चल रहे कार्यों का भी निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों को कार्य में तेजी लाने तथा मानसून से पहले इसे पूरा करने के निर्देश दिए। यह परियोजना बरसाती पानी की सुचारु निकासी सुनिश्चित करने में सहायक होगी।
इसके अलावा सेंट्रल पेरिफेरल रोड (सीपीआर) के साथ स्थित 6.5 किलोमीटर लंबे आरसीसी बाक्स ड्रेन के डी-सिल्टिंग कार्यों की भी समीक्षा की। यह ड्रेन लेग-चार से जुड़कर बरसाती पानी को नजफगढ़ ड्रेन तक पहुंचाने में मदद करेगा तथा एसपीआर और द्वारका एक्सप्रेसवे के आसपास के क्षेत्रों में जलभराव की समस्या को कम करेगा।

