हरियाणा में तालाबों को प्रदूषित करने पर लगेगा जुर्माना, कचरा मिलने पर पंचायतों और अधिकारियों की तय होगी जवाबदेही

यमुनानगर। तालाबों की स्थिति गंभीर बनी हुई है। प्रदेश के 20043 तालाबों में से 10916 प्रदूषित हैं। 1683 तालाब ओवरफ्लो की स्थिति में हैं, जबकि 3,564 तालाब उपयोग के लायक नहीं बचे हैं। 2344 तालाब पूरी तरह सूख चुके हैं।

सर्वोच्च न्यायालय द्वारा ऐतिहासिक आदेश के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में खलबली मची है। जिसके बाद ग्रामीण विकास विभाग के निदेशक ने अप्रैल 2026 से स्वच्छ गांव स्वच्छ जलवायु अभियान शुरू किया है।

इसके तहत तालाबों में कचरा मिलने पर ग्राम पंचायतों पर 500 से 5,000 रुपये तक जुर्माना लगाया जाएगा। ओडीएफ प्लस से बाहर होने पर ग्रांट भी रूक सकती है। साथ ही सरपंच, ग्राम सचिव और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जाएगी।

तालाबों तक गंदगी पहुंचने के स्रोतों पर रोक लगाने पर जोर दिया है। इसके लिए नालों और कचरा प्रवाह वाले स्थानों की पहचान कर वहां बैरियर और लोहे के जाल लगाए जाएंगे। तालाबों की सतह पर तैरते कचरे की नियमित सफाई की जाएगी और डंप साइटों की जीपीएस मैपिंग कर पुराने कचरे का वैज्ञानिक निस्तारण किया जाएगा।

हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार अभियान का उद्देश्य केवल सफाई नहीं, बल्कि तालाबों को भूजल रिचार्ज, पशुपालन और मत्स्य पालन के लिए सुरक्षित बनाए रखना है।

प्रदेश में तालाबों की स्थिति

तालाब प्राधिकरण के अनुसार प्रदेश में 19,133 तालाब ग्रामीण क्षेत्रों और 910 शहरी क्षेत्रों में हैं। इनमें 19,088 तालाब आधा एकड़ या उससे अधिक क्षेत्रफल के हैं। केवल 6,775 तालाब ही पूरी तरह स्वच्छ श्रेणी में हैं। बाकी तालाबों में किसी न किसी स्तर पर प्रदूषण, गाद या अतिक्रमण की समस्या बनी हुई है।

प्रदेश में 12,661 तालाब पशुओं के जल स्रोत के रूप में उपयोग हो रहे हैं, जबकि 8,202 तालाबों में मत्स्य पालन किया जा रहा है। सिंचाई के लिए केवल 696 तालाबों का उपयोग होता है।

निगरानी और जिम्मेदारी तय

अभियान के तहत ब्लाक स्तर पर खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी (बीडीपीओ) को नोडल अधिकारी बनाया गया है। ग्राम स्तर पर सरपंच, पंचायत सचिव और वार्ड पंचों को निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है।

उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि गांव का कचरा तालाबों तक न पहुंचे और जल स्रोत साफ रहें। प्रदूषण बोर्ड को ओवरआल निगरानी की जिम्मेदारी है। पोर्टल पर नियमित निरीक्षण व रिपोर्टिंग की व्यवस्था की गई है। निरीक्षण के दौरान गंदगी मिलने पर कार्रवाई का प्रावधान रखा गया है।

तालाब बचाने के लिए नए उपाय

तालाबों में प्रदूषण रोकने के लिए कई तकनीकी उपाय लागू करने का निर्णय लिया है। जिन स्थानों से नालियों या ठोस कचरे का प्रवाह तालाबों में होता है, वहां लोहे के जाल और बैरियर लगाए जाएंगे। इसके साथ ही तालाबों की सतह पर तैरने वाले कचरे की नियमित सफाई की व्यवस्था अनिवार्य की जाएगी।

तालाबों के आसपास वर्षों से जमा कचरे और डंप साइटों की जीपीएस मैपिंग कर उन्हें वैज्ञानिक तरीके से हटाया जाएगा। घर-घर से निकलने वाले कचरे को स्रोत पर ही गीला, सूखा व अन्य श्रेणियों में अलग करने की व्यवस्था भी लागू की जाएगी।

तालाब पर कचरा फेंकने पर कार्रवाई

नए प्रावधानों के तहत तालाबों और सार्वजनिक स्थानों पर कचरा फेंकना या जलाना नियमों का उल्लंघन माना जाएगा। निरीक्षण के दौरान गंदगी मिलने पर संबंधित ग्राम पंचायत पर 500 से 5,000 रुपये तक जुर्माना लगाया जाएगा।

बार-बार उल्लंघन की स्थिति में पर्यावरण कानूनों के तहत आगे की कार्रवाई का भी प्रावधान है। जेल भी हो सकती है। यदि निगरानी व्यवस्था में लापरवाही पाई जाती है तो संबंधित अधिकारियों और प्रतिनिधियों की जवाबदेही भी तय की जाएगी।

सहयोग से ही सुरक्षित व स्वच्छ बन सकते तालाब

पंचायत राज विभाग के एक्सईएन लव कुमार ने बताया कि अभियान का उद्देश्य केवल जुर्माना लगाना नहीं, बल्कि पारंपरिक जल स्रोतों का संरक्षण है। नियमित सफाई, अतिक्रमण हटाना व गंदे पानी के प्रवेश पर रोक जरूरी है। पंचायतों व ग्रामीणों के सहयोग से तालाबों को सुरक्षित और स्वच्छ बनाया जा सकता है।

उधर, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी प्रदीप सिंह ने तालाबों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की जानकारी होने से इन्कार किया। उनका कहना है कि तालाबों के रखरखाव और प्रबंधन की जिम्मेदारी पंचायती राज विभाग की है।

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