
गुरुग्राम। पश्चिम एशिया संकट के बीच ब्रिक्स देशों के ऊर्जा मंत्रियों का सम्मेलन साइबर सिटी में होगा। 22 से 25 जून तक चलने वाले इस सम्मेलन में दुनिया भर में बढ़ रही ऊर्जा की डिमांड के ऊपर चर्चा की जाएगी।
ग्लाेबल वार्मिंग को ध्यान में रखकर कैसे डिमांड को पूरी की जा सकती है, इस बारे में सभी देश मंथन करेंगे। सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के ऊपर विशेष रूप से चर्चा की जाएगी। कैसे सभी देश एक-दूसरे को सहयोग करेंगे, इस बारे में रणनीति तैयार किए जाने की उम्मीद है।
गत वर्ष ब्राजील के ब्रासीलिया में ब्रिक्स देशों के ऊर्जा मंत्रियों का सम्मेलन आयोजित किया गया था। उसी में अगले सम्मेलन की मेजबानी भारत को सौंपी गई थी। भारत सरकार ने सम्मेलन के लिए साइबर सिटी के होटल ग्रैंड हयात का चयन किया है।
ऊर्जा अधिकारियों की बैठक पहले ही हाे चुकी
सम्मेलन से पहले ब्रिक्स देशों से संबंधित ऊर्जा विभाग के अधिकारियों की बैठक आयोजित हाे चुकी है। बैठक में ब्रिक्स डिजिटल सेंटर आफ एक्सीलेंस, स्मार्ट ग्रिड प्रोजेक्ट के साथ ही एक-दूसरे देशों के बीच ऊर्जा सहयोग के लिए रोडमैप तैयार करने पर चर्चा की गई थी।
इन सभी विषयों को मंत्रियों के सम्मेलन में रखा जाएगा। चर्चा के बाद इसे मूर्तरूप दिया जाएगा। सम्मेलन में किसी भी स्तर पर कमी न रहे इसके लिए केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय के अधिकारियों ने बैठकें शुरू कर दी हैं।
बृहस्पतिवार को मंत्रालय के कई अधिकारियों ने सम्मेलन स्थल पर गुरुग्राम के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंंने स्थानीय अधिकारियों से सम्मेलन की रूपरेखा के बारे में चर्चा की।
स्थानीय अधिकारियों में शामिल उपायुक्त उत्तम सिंह, एडीसी सोनू भट्ट एवं इलाके के एसडीएम संजीव सिंगला मौजूद रहे। बैठक में सुरक्षा व्यवस्था से लेकर सभी संबंधित बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
30 देशों के मंत्री या अन्य प्रतिनिधि शामिल होंगे
सम्मेलन में ब्रिक्स देशों के ऊर्जा मंत्रियों के अलावा कुल 30 देशों के ऊर्जा मंत्री या उन देशों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। ब्रिक्स देशों के अलावा अन्य अतिथि देश के रूप में शामिल होंगे। दुनिया के जितने भी अंतरराष्ट्रीय संगठन हैं, उनकी बैठक में कुछ देशों को अतिथि के रूप में आमंत्रित किया जाता है।
जी-20 देशों की बैठक में भी कई अन्य देशों के प्रतिनिधि पहुंचे थे। बता दें कि ब्रिक्स विकासशील देशों का संगठन है। इसमें ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात एवं इंडोनेशिया शामिल हैं।
पश्चिम एशिया संकट ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया है। कुछ देश बोल रहे हैं, कुछ नहीं बोल रहे हैं लेकिन ऊर्जा संकट गहराने की आशंका से सभी परेशान हैं। ऐसे में ब्रिक्स देशों का सम्मेलन काफी महत्वपूर्ण है।
इस संकट से निकलने को लेकर सभी मंथन करेंगे। तेल एवं गैस दोनों ऊर्जा से संंबंधित है। दोनों की कमी आसानी से दूर नहीं हो सकती क्योंकि पश्चिम एशिया संकट से काफी नुकसान हुआ है।
– केएम लाल, पूर्व सलाहकार योजना आयोग एवं पूर्व अतिरिक्त सचिव, विदेश मंत्रालय

