गुरुग्राम मेट्रो के लिए जर्मनी से आई अच्छी खबर, KFW बैंक ने परखा कॉरिडोर; फंडिंग की उम्मीद बढ़ी

गुरुग्राम। गुरुग्राम मेट्रो रेल परियोजना के लिए बड़ी अच्छी खबर आई है। जर्मनी के सरकारी विकास बैंक केएफडब्ल्यू के चार सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने चार दिन तक गुरुग्राम मेट्रो रेल लिमिटेड (जीएमआरएल) का दौरा कर परियोजना का गहन मूल्यांकन किया। इस दौरे से परियोजना को अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सहायता मिलने की उम्मीद मजबूत हो गई है।

मूल्यांकन मिशन के दौरान केएएफडब्ल्यू टीम ने जीएमआरएल के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ परियोजना की जरूरत, वित्तपोषण ढांचे, खरीद प्रक्रिया, पर्यावरण-सामाजिक सुरक्षा उपायों, काम की समय-सीमा और तैयारियों पर विस्तार से बात की।

बैठक में जीएमआरएल के निदेशक (वित्त) रजत वर्मा, निदेशक (परियोजनाएं एवं योजना) एसआर सांगवा और निदेशक (रोलिंग स्टाक एवं इलेक्ट्रिकल्स) राजेश चतुर्वेदी मौजूद रहे।

प्रतिनिधिमंडल ने मल्टीमाॅडल इंटीग्रेशन और लास्ट-माइल कनेक्टिविटी पर अंतरराष्ट्रीय अनुभव भी साझा किए। टीम ने बताया कि कैसे मेट्रो को बस, रेल और रैपिड मेट्रो से जोड़कर यात्रियों के लिए निर्बाध सफर बनाया जा सकता है।

जमीन पर उतरकर परखा कॉरिडोर

प्रतिनिधिमंडल ने पूरे मेट्रो कॉरिडोर का स्थलीय निरीक्षण किया। प्रस्तावित अलाइनमेंट, स्टेशन स्थल, डीएमआरसी येलो लाइन से इंटरचेंज प्वाइंट, बस टर्मिनल, रेलवे स्टेशन, सेक्टर-33 का प्रस्तावित डिपो, कास्टिंग यार्ड, श्रमिक शिविर, केएमपी कॉरिडोर के साथ वनीकरण स्थल और बसई तालाब का दौरा किया गया।

टीम ने रैपिड मेट्रो में सफर कर यात्रियों के आवागमन पैटर्न और यात्री संख्या को भी समझा। जीएमआरएल ने इंजीनियरिंग, परिचालन और पर्यावरणीय पहलुओं पर तकनीकी प्रस्तुतियां दीं।

प्रतिनिधिमंडल ने जीएमडीए के अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी और जीएमसीबीएल के सीईओ विश्वजीत चौधरी से भी मुलाकात की। बैठक में समन्वित योजना, मल्टीमाडल एकीकरण और सभी एजेंसियों के बीच तालमेल पर जोर दिया गया, ताकि गुरुग्राम को टिकाऊ और एकीकृत सार्वजनिक परिवहन मिल सके।

चार दिवसीय मिशन के अंत में सभी प्रमुख बिंदुओं पर सहमति बनी और बैठक के एमओएम पर दोनों तरफ से औपचारिक हस्ताक्षर किए गए।

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