
गुरुग्राम। नगर निगम गुरुग्राम ने जलापूर्ति और सीवरेज सेवाओं को पूरी तरह डिजिटल कर दिया है। अत्याधुनिक वाटर मैनेजमेंट सिस्टम के जरिए अब नए जल कनेक्शन, बिलिंग, मीटर रीडिंग, शिकायत निवारण, जीआईएस मैपिंग और अवैध कनेक्शनों पर कार्रवाई जैसी सभी सेवाएं एकीकृत डिजिटल प्लेटफार्म से संचालित की जा रही हैं।
इससे न केवल नागरिकों को घर बैठे सुविधाएं मिल रही हैं, बल्कि जल वितरण व्यवस्था की निगरानी और राजस्व संग्रह भी अधिक प्रभावी हो रहा है।
बुधवार को निगमायुक्त प्रदीप दहिया की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में अधिकारियों ने डिजिटल वाटर मैनेजमेंट सिस्टम की प्रगति की समीक्षा की। बैठक में अतिरिक्त निगमायुक्त यश जालुका एवं रविंद्र यादव, मुख्य अभियंता विजय ढाका, मुख्य लेखा अधिकारी विजय सिंगला तथा कार्यकारी अभियंता प्रदीप कुमार मौजूद रहे।
30 हजार से 1.94 लाख तक पहुंचे उपभोक्ता
नगर निगम ने वर्ष 2013 में जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (पीएचईडी) से जलापूर्ति एवं सीवरेज व्यवस्था का कार्यभार संभाला था। उस समय निगम के पास लगभग 30 हजार मीटर्ड जल कनेक्शन थे, जबकि वर्तमान में सक्रिय मीटर्ड उपभोक्ताओं की संख्या बढ़कर 1,94,124 हो चुकी है।
स्मार्ट मीटर-जीआईएस से होगी बेहतर निगरानी
नगर निगम अब 465 अल्ट्रासोनिक स्मार्ट मीटर लगाने की दिशा में कार्य कर रहा है। इसके साथ ही ट्यूबवेल, बूस्टिंग स्टेशन और अन्य जल परिसंपत्तियों की जीआईएस मैपिंग भी की जा रही है।
इससे जल वितरण नेटवर्क की सटीक निगरानी, लीकेज की पहचान और नाॅन रेवेन्यू वाटर (एनआरडब्ल्यू) को कम करने में मदद मिलेगी।
घर बैठे मिल रहीं सुविधाएं
नई डिजिटल प्रणाली के तहत नागरिक अब नए जल कनेक्शन के लिए आवेदन, बिल डाउनलोड एवं भुगतान, उपभोक्ता विवरण संशोधन, अस्थायी डिस्कनेक्शन, दोबारा कनेक्शन तथा विभिन्न प्रमाण पत्रों के लिए आवेदन कर सकते हैं। पूरी प्रक्रिया समयबद्ध होने के साथ प्रत्येक चरण की ट्रैकिंग भी उपलब्ध कराई गई है।
अवैध कनेक्शनों पर सख्ती
जल चोरी और अवैध उपयोग पर अंकुश लगाने के लिए निगम ने विशेष अभियान शुरू किया है। अब तक 95 चालान जारी कर 5.39 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है, जबकि नियमों के विरुद्ध पाए गए 225 जल कनेक्शनों को डिस्कनेक्ट किया जा चुका है। साथ ही प्रॉपर्टी आईडी मैपिंग के जरिए बिना पंजीकृत कनेक्शनों की पहचान भी की जा रही है।
डिजिटल व्यवस्था से बढ़ी पारदर्शिता
नई प्रणाली में मोबाइल आधारित मीटर रीडिंग, रियल टाइम बिल जनरेशन, एसएमएस अलर्ट, शिकायत निवारण, ऑडिट ट्रेल और बहु स्तरीय डिजिटल अनुमोदन जैसी सुविधाएं शामिल हैं। इससे विभागीय कार्यप्रणाली अधिक पारदर्शी हुई है और नागरिकों को तेज एवं समयबद्ध सेवाएं मिल रही हैं।
बेहतर जल सेवाओं पर रहेगा फोकस
निगमायुक्त प्रदीप दहिया ने कहा कि बकाया वसूली, बिना बिल वाले क्षेत्रों की पहचान, अवैध कनेक्शनों पर कार्रवाई और जलापूर्ति नेटवर्क के आधुनिकीकरण के लिए व्यापक कार्ययोजना लागू की जा रही है। इसका उद्देश्य राजस्व संग्रह बढ़ाने के साथ नागरिकों को अधिक विश्वसनीय, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण जल सेवाएं उपलब्ध कराना है।

