
बादशाहपुर (गुरुग्राम)। साइबर सिटी में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को नई दिशा देने की तैयारी शुरू हो गई है। गुरुग्राम महानगर सिटी बस लिमिटेड (जीएमसीबीएल) शहर में 200 इलेक्ट्रिक बसों के संचालन की योजना पर काम कर रहा है।
इन बसों का संचालन किन मार्गों पर किया जाए और यात्रियों को बेहतर सुविधा कैसे मिले, इसके लिए निगम ने आमजन से सुझाव मांगे हैं। सर्वे का काम एक निजी कंपनी कर रही है। इसके लिए आनलाइन यात्री सर्वे शुरू किया गया है। जिसमें लोग क्यूआर कोड स्कैन कर या आनलाइन फार्म भरकर अपनी राय दे सकते हैं।
ज्यादा प्रभावी होगा नेटवर्क
जीएमसीबीएल का उद्देश्य यात्रियों की वास्तविक जरूरतों के अनुसार बस रूट तैयार करना है। सर्वे में लोगों से पूछा जा रहा है कि वे किस मार्ग पर यात्रा करते हैं, किन क्षेत्रों में बस सेवा की आवश्यकता है, बसों की समय-सारिणी कैसी होनी चाहिए और अंतिम छोर तक बेहतर कनेक्टिविटी के लिए क्या सुधार किए जाने चाहिए। अधिकारियों का मानना है कि यात्रियों की राय के आधार पर तैयार होने वाला बस नेटवर्क अधिक उपयोगी और प्रभावी साबित होगा।
वर्तमान में जीएमसीबीएल की सिटी बसें शहर के विभिन्न 33 मार्गों पर संचालित हो रही हैं और प्रतिदिन हजारों यात्री इनका उपयोग करते हैं।
200 नई इलेक्ट्रिक बसों के शामिल होने से सार्वजनिक परिवहन का दायरा और बढ़ेगा। इससे नए सेक्टरों, मेट्रो स्टेशनों, औद्योगिक क्षेत्रों, पुराने शहर और बाहरी इलाकों तक बेहतर बस सेवा उपलब्ध कराने की योजना है। इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से प्रदूषण में कमी आने के साथ यात्रियों को आधुनिक और आरामदायक सफर की सुविधा भी मिलेगी।
द्वारका एक्सप्रेसवे के आसपास की सोसायटियों में सिटी बस संचालन की काफी दिनों से मांग की जा रही है। द्वारका एकप्रेसवे पर पब्लिक परिवहन की सुविधा न के बराबर है।
अधिक से अधिक लोगों से बात करने की अपील
द्वारका एक्सप्रेसवे गुरुग्राम विकास एसोसिएशन के संयोजक सुनील सरीन ने अधिक से अधिक लोगों से सर्वे में भाग लेने की अपील की है। उनका कहना है कि आमजन के सुझावों के आधार पर ही नए रूट और बस सेवाओं की रूपरेखा तैयार की जाएगी, ताकि शहर की जरूरत के अनुरूप मजबूत और सुविधाजनक सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था विकसित की जा सके।
जीएमसीबीएल के डिपो मैनेजर नरेश कुमार का कहना है कि अभी जो सिटी बसें संचालित हो रही है। उनकी लंबाई 12 मीटर है और जो इलेक्ट्रिक बसें आनी है। उनकी लंबाई 9 मीटर है। इसी बात को ध्यान में देखकर एक निजी कंपनी सर्वे कर रही है।

