उत्तराखंड कांग्रेस में आंतरिक कलह और साजिशों का बोलबाला, फिजां में तैर रहा सवाल

 देहरादून। बंगाल, असम व पुुडुचेरी के विधानसभा चुनावों में मिली ऐतिहासिक सफलता से बम-बम भाजपा उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव में भी परचम फहराने के दृष्टिगत सांगठनिक कील-कांटे दुरुस्त करती दिखाई दे रही है।

वहीं, इसके उलट वर्ष 2017 से अपनी सियासी जमीन तलाश रही कांग्रेस पार्टी साजिश, गुटीय खींचतान और दुरभिसंधि के चक्र में फंसी नजर आती है।

ठगी की ताजा घटना और कांग्रेस के बड़े नेताओं को झांसे में लेने के सामने आए प्रकरण के बाद से पार्टी में तनाव और असहज वातावरण के बीच बेचैनी साफ महसूस की जा सकती है। इसी परिदृश्य के बीच पार्टी की प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा का गढ़वाल मंडल का दौरा भी बुधवार से प्रारंभ होने जा रहा है।

सियासी पिच पर मात खाती आ रही कांग्रेस

उत्तराखंड में वर्ष 2014 से लोकसभा और पिछले नौ साल से राज्य विधानसभा की सियासी पिच पर मात खाती आ रही कांग्रेस अंतर्कलह और गुटीय खींचतान से जूझ रही है। अब ताजा घटनाक्रम ने नई चुनौती खड़ी कर दी है।

ठगी के आरोप में पकड़े गए व्यक्ति ने स्वयं को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का वैयक्तिक सहायक बताया और इसी आड़ में प्रदेश कांग्रेस के बड़े नेताओं को झांसे में लेने का प्रयास किया। इस प्रकरण में खुद को कांग्रेसी कहने वाली भावना पांडे ने इस व्यक्ति के विरुद्ध ठगी की रिपोर्ट पुलिस में दर्ज कराई है। उनका दावा है कि ठगी करने वाले व्यक्ति ने मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष को हटाकर अन्य दो नेताओं में से किसी एक को अध्यक्ष बनाने की बात कही थी।

प्राथमिकी का सच और दावे तो अपनी जगह है, लेकिन इस प्रकरण ने कांग्रेस में खलबली मचा दी है। प्रदेश कांग्रेस के नेताओं की बेचैनी यह दर्शाने को काफी है कि पार्टी में अंदरखाने सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। ये बात भी उठ रही कि कहीं भावना पांडे को मोहरा तो नहीं बनाया गया।

फिजां में तैर रहा सवाल

वहीं, पांडे का दावा है कि ठग ने उनसे 25 लाख रुपये ऐंठ लिए। यह रकम किस बात के लिए ली गई और पर्दे के पीछे कौन है, यह प्रश्न भी फिजां में तैर रहा है। यही नहीं, हाल के दिनों में इंटरनेट मीडिया में भावना पांडे का प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के विरुद्ध मोर्चा खोलना भी चर्चा के केंद्र में रहा था।

ताजा घटनाक्रम और पूर्व के एक-दो संदर्भ यह संकेत दे रहे हैं कि प्रदेश कांग्रेस के शीर्ष नेताओं के बीच आपसी तालमेल सिरे से गायब है। यह परिदृश्य इस तरफ भी इशारा कर रहा है कि प्रदेश कांग्रेस के भीतर गुटीय खींचतान और दुरभिसंधियों का बोलबाला है। खींचतान और तनाव के इस माहौल के बीच ही प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा का दौरा होने जा रहा है।

वह बुधवार शाम को ऋषिकेश पहुंचेंगी और फिर टिहरी, चमोली, रुद्रप्रयाग जिलों का दौरा करेंगी। यद्यपि, प्रदेश प्रभारी के दौरे में प्रदेश कांग्रेस के नेता एकजुट रहने का संदेश देंगे, लेकिन उनके जाने के बाद प्रदेश संगठन फिर से इन्हीं परिस्थितियों में होगा।

खींचतान का ही नतीजा है कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल नौ माह से अपनी प्रांतीय टीम तक घोषित नहीं कर पाए हैं, जबकि वह कई बार इसे लेकर दिल्ली की दौड़ लगा चुके हैं। अब देखना होगा कि बदली परिस्थितियों में प्रदेश कांग्रेस अंदरुनी षड्यंत्र के खेल का किस तरह मुकाबला करती है।

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