
बादशाहपुर (गुरुग्राम)। कासन गांव के बहुचर्चित पूर्व एनएसजी कमांडो सुंदरपाल उर्फ सुंदर फौजी हत्याकांड में अदालत ने हथियार उपलब्ध कराने के आरोपित बुलंदशहर के गांव समसपुर का कुलदीप उर्फ मोनू को नियमित जमानत दे दी है।
हो सकती है तीन साल की सजा
हालांकि, अभियोजन ने आरोपित को अवैध हथियारों की बिक्री में शामिल बताते हुए जमानत का विरोध किया था। अदालत ने कहा कि आरोपित के विरुद्ध मुख्य आरोप कारतूस बेचने का है, जिसका इस्तेमाल बाद में सुंदरपाल की हत्या में हुआ। इस अपराध में अधिकतम तीन साल की सजा का प्रावधान है।
कार्तिक और गुलशन गिरफ्तार किया
कासन गांव में 30 अप्रैल की सुबह सुंदरपाल मोनी बाबा के चबूतरे पर बैठे थे। इसी दौरान उन पर गोलियां चला दीं। सुंदरपाल को फोर्टिस अस्पताल में चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। जांच में पुलिस ने कार्तिक और गुलशन को गिरफ्तार किया।
दोनों के बयानों से पता चला कि हत्या में इस्तेमाल देशी कट्टा हंस राघव से लिया गया था। हंस राघव से पूछताछ के बाद पुलिस अंशु राघव तक पहुंची और अंशु ने हथियार शूटर शुुभम से खरीदने की बात बताई। वहीं, कार्तिक ने हत्या में इस्तेमाल कारतूस सुशील उर्फ सुनील से खरीदने की बात कही।
एक जमानती पर रिहा करने के आदेश
सुशील पहले से बुलंदशहर जेल में बंद था। उसे प्रोडक्शन वारंट पर गुरुग्राम लाया गया। पूछताछ में उसने बताया कि उसने कारतूस कुलदीप से खरीदा था। इसके बाद पुलिस ने सुशील की निशानदेही पर 23 मई को कुलदीप के घर छापा मारा, लेकिन वह नहीं मिला।
27 मई को कुलदीप ने क्राइम यूनिट सेक्टर-10 के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। पूछताछ के बाद उसे गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। अदालत ने कुलदीप को 50 हजार रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि के एक जमानती पर रिहा करने के आदेश दिए।

