कुशीनगर में गहराया ईंधन संकट, पेट्रोल-डीजल के साथ रसोई गैस की भी किल्लत

पडरौना, (कुशीनगर)। पेट्रोल-डीजल की किल्लत से ग्रामीण क्षेत्रों के उपभोक्ताओं को अभी राहत मिलती नजर नहीं आ रही है। शुक्रवार को स्थिति यह रही कि 171 पंपों में से 164 पर शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों में पेट्रोल तो कहीं डीजल का अभाव बना रहा है। हाईवे पर स्थित लगभग 35 पंपों पर डीजल व पेट्रोल दोनों उपलब्ध रहा। हालांकि दोपहर में तेज धूप की वजह से वाहनों की संख्या कम दिखी, लेकिन शाम को भीड़ बढ़ गई।

जिले में कुल नौ पंप ड्राई रहे। नगर के बड़ी गंडक नहर के बगल में स्थित पंप पर डीजल पर नो फ्यूल लिखकर कागज लगाया गया था। इससे चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ा। सुबह ईंधन लेने पहुंचे लोगों को पर्याप्त आपूर्ति न मिलने से निराशा ही हाथ लगी। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति और भी खराब होने से किसानों और आम लोगों को आवागमन में दिक्कत हुई।

खासकर खेती-किसानी के कार्यों में लगे लोगों को डीजल न मिलने से परेशानी बढ़ गई है। उपभोक्ताओं का कहना है कि पिछले कई दिनों से यही स्थिति बनी हुई है, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है।

पेट्रोलियम एसोसिएशन के अध्यक्ष आदित्य त्रिपाठी, पूर्व अध्यक्ष संजय कुमार सिंह, मनीष तुलस्यान, राकेश कुमार, इंतखाब आलम का कहना है कि डिमांड के मुकाबले सप्लाई कम मिलने से यह संकट बढ़ता जा रहा है। नियमित आपूर्ति मिलने पर स्थिति सामान्य हो पाएगी। जिला पूर्ति अधिकारी कृष्ण गोपाल पांडेय ने कहा कि तेल कंपनियों से वार्ता के बाद कुछ दिनों में हालात सुधरने की उम्मीद है।

  • तेल कंपनियों को नियमित आपूर्ति करने से ही आमजन को राहत मिलेगी। इसके लिए प्रशासनिक स्तर पर ठोस कदम उठाना चाहिए। अभी ग्रामीण क्षेत्रों में दिक्कत बनी हुई है।-रोशन मोदनवाल, उपभोक्ता
  • खेती का समय चल रहा है। तीन पंपों पर तलाश के बाद डीजल मिला है। अधिकारियों को चाहिए कि वह डीजल को लेकर विशेष सतर्कता बरतें ताकि खेती प्रभावित न हो।-अजय कमानी, उपभोक्ता
  • दो दिनों से स्थिति में कुछ सुधार दिख रहा है कि पंपों पर लाइन नहीं लगाना पड़ रहा है। विभाग को आपूर्ति सामान्य कराने के लिए तेल कंपनियों से वार्ता कर दुरुस्त कराया जाए।-हीरालाल खेतान, उपभोक्ता
  • पेट्रोल संचालकों की मनमानी से यह स्थिति बनी हुई। कभी डीजल मिलता तो कभी पेट्रोल और जब दोनों उपलब्ध रहता है तो मशीन खराब होने का बोर्ड लगा रहता है। इस पर ध्यान देना चाहिए। -गौरव अग्रवाल, उपभोक्ता


बैकलाग में कमी के बावजूद गोदामों पर लग रही कतारें
घरेलू व कामर्शियल गैस सिलिंडर को लेकर उपभोक्ताओं की परेशानी कम होते नहीं दिख रही है। हालांकि बैकलाग एक लाख से घट कर 88 हजार तक पहुंच गया है, लेकिन मांग के सापेक्ष जिले की आपूर्ति सुधार होते नहीं दिख रहा है। जिससे होटल, ढाबा संचालकों व समारोहों से जुड़े लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है तो गृहिणी भी इसको लेकर परेशान हैं।

शुक्रवार को धूप में होम डिलीवरी वाहन व गोदामों पर लंबी कतारें लगी रहीं, जिन्हें घंटों इंतजार के बाद भी खाली हाथ लौटना पड़ा। होटल और रेस्टोरेंट संचालकों का कहना है कि सिलिंडर न मिलने से व्यवसाय प्रभावित हो रहा है। आरोप है कि पर्याप्त स्टाक होने के बावजूद एजेंसी संचालक मनमानी कर रहे हैं।

रसोई गैस की पर्याप्त उपलब्धता के प्रशासनिक दावों के बावजूद सिलिंडर की कमी दूर नहीं हो पा रही है। जिले में करीब नौ लाख 24 हजार चार सौ 45 उपभोक्ता हैं, जिन्हें 96 गैस एजेंसियों के माध्यम से रसोई गैस उपलब्ध कराई जाती है।

गैस एजेंसी संचालक शशांक सिंह व जितेंद्र प्रसाद ने बताया कि गैस की आपूर्ति सामान्य है। होम डिलीवरी कराई जा रही है। जिला पूर्ति अधिकारी कृष्ण गोपाल पांडेय ने कहा कि सेल्स आफिसर से वार्ता कर सुधार कराया जाएगा।

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