गंगा में विक्रमशिला सेतु पर मई में शुरू होगा बेली ब्रिज निर्माण, 10 टन क्षमता का 50 मीटर लंबा अस्थायी पुल बनेगा

भागलपुर। गुरुवार को एनएच विभाग, पुल निर्माण निगम और सीमा सड़क संगठन (BRO) की संयुक्त बैठक में विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त हिस्से पर बेली ब्रिज बनाने का अंतिम निर्णय लिया गया। इस अस्थायी पुल की क्षमता 10 टन भार तक होगी और इसे टूटे हिस्से के दोनों सिरों से जोड़कर स्थापित किया जाएगा।

बैठक में यह भी तय किया गया कि जहां तक कंपन महसूस होने की संभावना है, उस स्थान पर पुल को तोड़कर सुरक्षित मार्ग तैयार किया जाएगा। मई में ही बेली ब्रिज का निर्माण पूरा करने की पहल तेज कर दी गई है। विशेषज्ञों की रिपोर्ट तैयार कर सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) को भेजी जा चुकी है। मंत्रालय की मंजूरी मिलते ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।

सेतु की मरम्मत और निगरानी

बैठक में यह भी मंथन किया गया कि क्षतिग्रस्त सेतु के दुरुस्तीकरण का कार्य 15 जून तक शुरू कर दिया जाए। पुल निर्माण निगम इस पूरे कार्य की निगरानी करेगा। हालांकि, अंतिम निर्णय सरकार और मंत्रालय की मंजूरी के बाद ही लिया जाएगा। साथ ही, शनिवार को सेतु को रिस्टोर करने संबंधी चिट्ठी MoRTH को भेजने का निर्णय लिया गया। इससे बेली ब्रिज और मरम्मत कार्य का प्रारंभ सुनिश्चित होगा।

दानापुर रेल मंडल की जांच

गुरुवार को दानापुर रेल मंडल की अभियंताओं की टीम नवगछिया की ओर से पुल का निरीक्षण करने पहुंची। टीम का नेतृत्व सीनियर डिवीजनल इंजीनियर (ब्रिज) मनोज कुमार ने किया। टीम ने पुल के ऊपरी और बाहरी हिस्सों की बारीकी से जांच की। इस दौरान भागलपुर एनएच विभाग के सहायक अभियंता भी मौजूद रहे। उन्होंने बताया कि निर्माण के दौरान पिलरों को स्थापित करने में समस्या आई। दो पिलर बार-बार बह गए, जिसके कारण डिजाइन में बदलाव करना पड़ा।

डिजाइन और निर्माण में हुई खामियां

मूल डिजाइन के अनुसार सभी स्लैब की लंबाई 24 मीटर थी, लेकिन निर्माण के दौरान पिलरों के बह जाने और भारी वाहनों के दबाव के कारण इसे 34 मीटर कर दिया गया। विशेषज्ञों का कहना है कि निर्माण समय में ही खामियां मौजूद थीं। उस समय छह-चक्के वाले ट्रकों का संचालन होता था और भारी वाहनों के लगातार दबाव ने स्लैब पर अतिरिक्त दबाव डाला। लगातार 24–48 घंटे जाम लगने के कारण एक्सपेंशन जॉइंट का गैप बढ़ गया और बेयरिंग खराब हो गया। इसके असर से पुल के दो अन्य स्लैब भी प्रभावित हुए।

बेली ब्रिज के निर्माण की तैयारी

एनएच के मुख्य अभियंता संजय भारती ने बताया कि मंत्रालय की मंजूरी मिलने के बाद बेली ब्रिज का निर्माण शुरू कर दिया जाएगा।

  • बेली ब्रिज 50 मीटर लंबा होगा।
  • पुल में छोटे चारपहिया वाहन, बाइक और एंबुलेंस चल सकेंगे।
  • भारी ट्रक और ओवरलोड वाहन इस पर नहीं चलेंगे।
  • पुल के निर्माण पर अनुमानित खर्च लगभग 3 करोड़ रुपये आएगा।

बेली ब्रिज का निर्माण अस्थायी लेकिन मजबूत होगा और टूटे हिस्से के दोनों सिरों को जोड़कर स्थापित किया जाएगा। इसके अलावा, सेतु के समानांतर दो लेन का ट्रस ब्रिज भी बनाया जाएगा, जिसमें पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित मार्ग की व्यवस्था होगी।

मरम्मत और सुरक्षा

विशेषज्ञों की रिपोर्ट के आधार पर, क्षतिग्रस्त सेतु के रिस्टोर और दुरुस्तीकरण कार्य पुल निर्माण निगम की निगरानी में किया जाएगा। इससे भागलपुर और नवगछिया के बीच सुरक्षित आवागमन जल्द बहाल हो सकेगा। इस पुल का निर्माण और मरम्मत कार्य दोनों ही स्थानीय आवागमन और व्यापार के लिए महत्वपूर्ण हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बेली ब्रिज और ट्रस ब्रिज दोनों आपातकालीन और अस्थायी सुरक्षित मार्ग के रूप में बेहद उपयोगी होंगे।

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