
नया गुरुग्राम। गुरुग्राम में रहने वाले लोगों को एक ही शहर के अलग-अलग इलाकों में गर्मी का अलग अनुभव होता है। 12 साल के उपग्रह आंकड़ों के अध्ययन में सामने आया है कि शहर के कुछ वार्डों में जमीन का तापमान दूसरे इलाकों की तुलना में आठ डिग्री सेल्सियस तक अधिक रहा।
यानी यदि सेक्टर-43 में तापमान 39 डिग्री हो, तो सेक्टर-84 में जमीन का तापमान करीब 44 डिग्री तक पहुंच सकता है। यह अध्ययन पर्यावरण पर काम करने वाली संस्था एनवायरोकैटालिस्ट्स ने वर्ष 2015 से 2026 के बीच मार्च से जून तक के आंकड़ों के आधार पर किया है।
सेटेलाइट तस्वीरों का अध्ययन किया गया
इसके लिए लैंडसैट-आठ और लैंडसैट-नौ उपग्रहों से प्राप्त तस्वीरों का विश्लेषण किया गया। अध्ययन के अनुसार, यह अंतर केवल मौसम की वजह से नहीं है। तेजी से बढ़ते कंक्रीट के निर्माण, हरियाली में कमी, पेड़ों की कटाई और डामर की सड़कों व कांच की इमारतों की बढ़ती संख्या के कारण जमीन का तापमान लगातार बढ़ रहा है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले 12 वर्षों में शहर का हर वार्ड पहले से अधिक गर्म हुआ है, लेकिन सभी इलाकों में इसकी रफ्तार समान नहीं रही। सबसे अधिक गर्मी वार्ड-24 (सिही गांव, सेक्टर-83, 84 और 88) में दर्ज की गई। वर्ष 2026 में यहां गर्मियों के दौरान जमीन का औसत तापमान 44.1 डिग्री सेल्सियस रहा।
2019 में जमीन का तापमान था सबसे अधिक
इसी वार्ड में मई 2019 में 56.73 डिग्री सेल्सियस का सबसे अधिक जमीन का तापमान दर्ज किया गया, जो पूरे अध्ययन का सबसे बड़ा आंकड़ा है। वार्ड-आठ (बसई, धनवापुर, राम विहार, सूरत नगर फेज-2, सेक्टर-100 से 104 और 37डी) में पिछले 12 वर्षों में सबसे ज्यादा 3.6 डिग्री सेल्सियस तापमान बढ़ा। इसके बाद वार्ड-24 में 2.71 डिग्री, वार्ड-3 में 2.5 डिग्री, वार्ड-4 में 2.3 डिग्री और वार्ड-19 में 2.31 डिग्री की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
रिपोर्ट के अनुसार वार्ड-22 और 23, जिनमें सुशांत लोक, डीएलएफ फेज-चार और पांच, सेक्टर-27, 42 और 43 के साथ खांडसा गांव और सेक्टर-10ए शामिल हैं, लगातार शहर के सबसे अधिक गर्म इलाकों में रहे। वहीं वार्ड-19 (सेक्टर-14, 15 और 31 के आसपास) भी लगातार अधिक गर्म क्षेत्रों में शामिल रहा।
इसके विपरीत वार्ड-32 और 33 (सेक्टर-सात, सेक्टर-सात एक्सटेंशन, शिवपुरी, न्यू कालोनी, कृष्णा कालोनी, ज्योति पार्क, लक्ष्मण विहार और आसपास के क्षेत्र) सबसे कम गर्म इलाकों में शामिल रहे। वार्ड-दो (डीएलएफ फेज-दो, साइबर हब, उद्योग विहार, सरहौल और डूंडाहेड़ा) भी अपेक्षाकृत कम गर्म रहा।
अध्ययन के अनुसार, वर्ष 2026 में वार्ड-24 का औसत जमीन का तापमान 44.1 डिग्री जबकि वार्ड-33 का 39.1 डिग्री रहा। यानी एक ही शहर में 5 डिग्री से अधिक का अंतर दर्ज किया गया। कुछ वर्षों में यह अंतर 8 डिग्री तक पहुंच गया।
इन इलाकों का तापमान बढ़ा है
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि वार्ड-25 (बादशाहपुर, सेक्टर-65 से 70) में सबसे कम 0.52 डिग्री और वार्ड-30 (ग्रीनवुड सिटी, मालिबू टाउन, मेफील्ड गार्डन और सुशांत लोक फेज-दो व तीन) में 0.63 डिग्री तापमान बढ़ा। इन इलाकों में अपेक्षाकृत अधिक हरियाली और खुले स्थान मौजूद हैं।
अध्ययन में बताया गया है कि इसमें हवा का तापमान नहीं, बल्कि सड़क, छत, पक्की जमीन और खुली सतह से निकलने वाली गर्मी को मापा गया है। इससे यह पता लगाया जाता है कि शहर के किन इलाकों में गर्मी का असर सबसे ज्यादा है।
संस्था के संस्थापक सुनील दहिया का कहना है कि पेड़ों की कटाई, जलाशयों का खत्म होना और उनकी जगह कंक्रीट व कांच की इमारतों के बढ़ने से कई इलाकों में जमीन का तापमान तेजी से बढ़ा है। उनका कहना है कि सबसे अधिक गर्मी वाले वार्डों में हरियाली बढ़ाने, छायादार स्थान विकसित करने और गर्मी से बचाव के लिए विशेष सुविधाएं उपलब्ध कराने की जरूरत है।

