
सोहना (गुरुग्राम)। गुरुग्राम में सोहना नागरिक अस्पताल में एक मजदूर की मौत के बाद शव को मोर्चरी में रखने में करीब तीन घंटे की देरी होने से अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई।
परिजनों का आरोप है कि चिकित्सक ने शव को मोर्चरी में रखने की अनुमति देने से इनकार कर दिया, जिससे उन्हें घंटों तक परेशान होना पड़ा। जनप्रतिनिधियों के हस्तक्षेप के बाद ही शव को मोर्चरी में रखा जा सका।
सोहना नागरिक अस्पताल में भर्ती कराया गया
मृतक के परिजन राकेश कुमार ने बताया कि उनके रिश्तेदार धीरज खेड़ला गांव में निर्माण कार्य के दौरान मजदूरी कर रहे थे। इसी दौरान छत का पत्थर सिर पर गिरने से वह गंभीर रूप से घायल हो गए। पहले उन्हें फरीदाबाद के एक अस्पताल ले जाया गया, जहां से बाद में सोहना नागरिक अस्पताल में भर्ती कराया गया।
तीन घंटे तक उपचार के बाद मौत हो गई
परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में करीब तीन घंटे तक उपचार के बाद उनकी हालत बिगड़ती गई और बाद में उनकी मौत हो गई। इसके बाद डॉ. योगेश साहू ने शव को मोर्चरी में रखने की अनुमति नहीं दी और कहीं अन्यत्र ले जाने की बात कही।
इसके बाद उन्होंने स्थानीय विधायक और अन्य जनप्रतिनिधियों से संपर्क किया। हस्तक्षेप के बाद अस्पताल प्रशासन ने शव को पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी में रखवाया। घटना से नाराज स्वजन ने अस्पताल प्रशासन और संबंधित चिकित्सक के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

