
नया गुरुग्राम। डीएलएफ फेज-तीन के यू ब्लॉक में 60 गज के करीब 2500 से अधिक मकानों पर कार्रवाई की संभावित तलवार लटकने के बीच प्रभावित मकान मालिकों ने अपना पक्ष अदालत के समक्ष मजबूती से रखने की तैयारी शुरू कर दी है। मकान मालिकों का कहना है कि पूरे ब्लॉक के मकानों को एक ही तराजू पर तौलना उचित नहीं होगा।
उनका तर्क है कि निर्माण में नियमों का उल्लंघन सभी मकानों में एक जैसा नहीं है। ऐसे में गंभीर रूप से नियमों का उल्लंघन करने वाले मकानों और निर्धारित मानकों के करीब बने मकानों को अलग-अलग श्रेणी में रखकर ही कार्रवाई की जानी चाहिए।
स्थानीय जानकारों के अनुसार, यू ब्लॉक के 2500 से अधिक मकानों में करीब 104 मकान ऐसे हैं, जिनमें सात से आठ मंजिल तक निर्माण किया गया है। इनमें करीब 90 मकान सात मंजिल तक और लगभग 14 मकान आठ या उससे अधिक मंजिल तक बने बताए जा रहे हैं।
प्रभावित मकान मालिकों का कहना है कि कुछ मकानों में हुए बड़े स्तर के निर्माण को आधार बनाकर पूरे यू ब्लॉक के हजारों मकानों को एक समान मानना न्यायसंगत नहीं होगा।
अदालत में अलग-अलग निर्माण का रखा जाएगा पक्ष
मकान मालिकों की ओर से अधिवक्ताओं के माध्यम से अदालत में यह पक्ष रखने की तैयारी है कि जिन मकानों में गंभीर और बड़े स्तर पर नियमों का उल्लंघन हुआ है, उनकी स्थिति अलग है। ऐसे मकानों पर निर्माण की प्रकृति और उल्लंघन की गंभीरता के आधार पर कार्रवाई की जा सकती है। लेकिन केवल 104 मकानों में सात-आठ मंजिल तक निर्माण होने के आधार पर बाकी हजारों मकानों को भी उसी श्रेणी में रखना उचित नहीं है।
निवासियों का कहना है कि किसी भी कार्रवाई से पहले प्रत्येक मकान की स्थिति, निर्माण की ऊंचाई और नियमों के उल्लंघन की वास्तविक स्थिति का आकलन किया जाना चाहिए। इससे नियमों का पालन करने वाले या नियमों के दायरे में लाए जा सकने वाले मकान मालिकों को राहत का रास्ता मिल सकता है।
नीति बनी तो नियमों के दायरे में आने को तैयार
निवासी ईश्वर यादव का कहना है कि यदि सरकार 60 गज के मकानों के लिए व्यावहारिक और स्पष्ट नीति बनाती है तो निवासी उसका पालन करने के लिए तैयार हैं। उनका दावा है कि कई मकान मालिक स्टिल्ट प्लस चार या स्टिल्ट प्लस पांच मंजिल तक के निर्माण को निर्धारित करीब साढ़े 16 मीटर की ऊंचाई सीमा के भीतर लाने के लिए तैयार हैं।
उनका कहना है कि सरकार को प्रभावित मकान मालिकों की वास्तविक स्थिति को ध्यान में रखते हुए व्यावहारिक समाधान निकालना चाहिए।
किराये की आय पर टिकी है कई परिवारों की आजीविका
यू ब्लॉक के निवासियों के अनुसार, बड़ी संख्या में परिवार इन मकानों से मिलने वाले किराये पर निर्भर हैं। कई मकानों में परिवार के रहने के साथ-साथ किराये के लिए भी कमरे बनाए गए हैं। ऐसे में यदि व्यापक स्तर पर कार्रवाई होती है तो इसका असर केवल मकानों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सीधे तौर पर परिवारों की आजीविका प्रभावित होगी।
निवासियों का आग्रह है कि सरकार और अदालत कार्रवाई के दौरान नियमों और शहरी नियोजन के पहलू के साथ प्रभावित परिवारों के आर्थिक हितों को भी ध्यान में रखें।
उनका कहना है कि जहां गंभीर उल्लंघन हुआ है, वहां कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन सभी मकानों को एक ही श्रेणी में रखकर फैसला लेने के बजाय निर्माण की वास्तविक स्थिति के आधार पर समाधान निकाला जाना चाहिए।

