
गुरुग्राम। गुरुग्राम का ज्यादातर क्षेत्र भूजल दोहन के कारण डार्क जोन में पहुंच चुका है। वहीं दूसरी ओर मानसून की वर्षा के दौरान लाखों लीटर वर्षा जल सड़कों और नालों के रास्ते बहकर व्यर्थ चला जाता है। भूजल स्तर लगातार गिरकर करीब 30 मीटर तक पहुंच चुका है, लेकिन वर्षा जल संचयन (रेन वाटर हार्वेस्टिंग) और भूजल पुनर्भरण के लिए काम जमीन पर नजर नहीं आ रहे हैं।
हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाए जा रहे
सरकारी विभागों की ओर से निरीक्षण और कार्रवाई के दावे किए जाते हैं, लेकिन पिछले पांच वर्षों में इस दिशा में कोई बड़ा अभियान या ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है। गुरुग्राम में 600 से ज्यादा रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बने हुए हैं, जिनमें 418 नगर निगम के हैं। नगर निगम द्वारा अब इन खराब पड़े सिस्टम को चालू करने के साथ ही आधुनिक रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाए जा रहे हैं।
ग्रुप हाउसिंग सोसायटियों की प्रतिनिधि बैठक
9 जून को हरियाणा सरकार के प्रधान सलाहकार (शहरी विकास) डीएस ढेसी ने विभिन्न ग्रुप हाउसिंग सोसायटियों की रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों (आरडब्ल्यूए) के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की तैयारियों और उनकी कार्यक्षमता की समीक्षा की थी। 20 एकड़ या उससे अधिक क्षेत्रफल वाली 30 से अधिक ग्रुप हाउसिंग सोसायटियों के प्रतिनिधि बैठक में शामिल हुए थे। पिछले छह महीनों में आरडब्ल्यूए के साथ यह तीसरी समीक्षा बैठक थी, लेकिन इन बैठकों के बावजूद जमीनी स्तर पर कोई खास सुधार दिखाई नहीं दे रहा है।
एक सेकंड में 25 लीटर पानी समाएगा जमीन में
हाइड्रोलाजिस्ट दलवीर सिंह राणा के अनुसार यदि वर्षा जल संचयन प्रणाली का निर्माण और रखरखाव वैज्ञानिक तरीके से किया जाए तो इसके माध्यम से लगभग 25 लीटर प्रति सेकंड पानी को जमीन में समाहित किया जा सकता है। इससे भूजल पुनर्भरण में बढेातरी होती है, जलभराव की समस्या कम होती है और शहर की ड्रेनेज व्यवस्था पर पड़ने वाला दबाव भी घटता है।
नियम हैं, पालन कमजोर
हरियाणा बिल्डिंग कोड-2017 और शहरी विकास से जुड़े प्रविधानों के तहत बड़े आवासीय, व्यावसायिक और औद्योगिक परिसरों में वर्षा जल संचयन व्यवस्था अनिवार्य है। बड़े प्लाॅटों और ग्रुप हाउसिंग सोसायटियों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम स्थापित करना जरूरी है। ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (ओसी) जारी करने से पहले इसकी व्यवस्था दिखानी होती है।
इसके अलावा भूजल पुनर्भरण के लिए रिचार्ज पिट, रिचार्ज वेल और अन्य जल संचयन संरचनाएं स्थापित करना भी अनिवार्य है। एचएसवीपी, नगर निगम, जीएमडीए और नगर एवं योजनाकार विभाग को समय-समय पर इन व्यवस्थाओं की जांच करनी होती है।
सड़कों पर बह जाता है करोड़ों लीटर पानी
विशेषज्ञों के अनुसार शहर में अधिकांश स्थानों पर छतों से आने वाला वर्षा जल सीधे ड्रेनेज लाइन में छोड़ दिया जाता है। कई सोसायटियों के रिचार्ज पिट गाद और कचरे से भरे हुए हैं, जबकि वर्षों से उनकी सफाई नहीं हुई। इसके अलावा अवैध निर्माणों के कारण प्राकृतिक जल निकासी मार्ग भी बाधित हो रहे हैं। नतीजतन वर्षा का पानी जमीन में समाने के बजाय सड़कों पर बह जाता है।
एक्सपर्ट ने कहा, जवाबदेही तय करने की जरूरत
“कई बिल्डर और डेवलपर वर्षा जल संचयन संरचनाएं केवल अनुमति और ओसी हासिल करने तक सीमित रखते हैं, बाद में उनका रखरखाव नहीं किया जाता। वहीं आरडब्ल्यूए और सोसायटी प्रबंधन भी नियमित निरीक्षण और सफाई को लेकर गंभीर नहीं हैं। दूसरी ओर सरकारी विभागों की ओर से नियमित आडिट और फील्ड निरीक्षण पर्याप्त नहीं होने के कारण कई मामलों में केवल कागजी अनुपालन को ही स्वीकार कर लिया जाता है। ऐसे में गुरुग्राम में गिरते भूजल स्तर को रोकने के लिए जवाबदेही तय करने और प्रभावी निगरानी तंत्र विकसित करने की जरूरत महसूस की जा रही है।”
-आरके कंसल, सेवानिवृत्त एसई।

