‘धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर नहीं मिला आश्वासन, फैसला सरकार को करना है’: सोनम वांगचुक

गुरुग्राम। मेदांता अस्पताल में उपचाराधीन सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के मुद्दे पर उन्हें सरकार की ओर से कोई स्पष्ट आश्वासन नहीं मिला है। हालांकि उनका मानना है कि यदि इस्तीफा नहीं होता है तो इसका नुकसान छात्रों को नहीं, बल्कि सरकार को उठाना पड़ेगा।

27वें दिन आमरण अनशन समाप्त करने के बाद इंटरनेट मीडिया पर वीडियो संदेश जारी अपने संदेश में वांगचुक ने कहा कि उनके सामने दो ही विकल्प थे। पहला, अनशन जारी रखकर अपनी जान जोखिम में डालना और दूसरा, स्वस्थ रहकर आंदोलन को आगे बढ़ाना।

उन्होंने कहा कि हजारों लोगों ने उनसे आग्रह किया कि उनकी जान आंदोलन के लिए महत्वपूर्ण है, इसलिए उन्होंने स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए अनशन समाप्त करने का निर्णय लिया।

वांगचुक ने कहा कि उनके लिए सबसे अहम मुद्दा आंदोलन में शामिल छात्रों के खिलाफ कोई मुकदमा दर्ज नहीं होना था। उन्होंने कहा कि वह जानते हैं कि एक एफआइआर किसी युवा के भविष्य को वर्षों तक प्रभावित कर सकती है।

सरकार की ओर से छात्रों पर कार्रवाई नहीं करने के आश्वासन पर उन्होंने संतोष जताया।

आगे भी जारी रहेगा आंदोलन

उन्होंने मृत छात्रों के स्वजन को मुआवजा देने और संसद में इस पूरे मुद्दे पर चर्चा कराने के निर्णय का भी स्वागत किया। वांगचुक ने कहा कि आंदोलन अभी समाप्त नहीं हुआ है, बल्कि आगे भी लोकतांत्रिक तरीके से जारी रहेगा।

अंत में उन्होंने देशभर के लोगों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सभी के सहयोग और समर्थन से यह संघर्ष आगे भी जारी रहेगा। उन्होंने अपने संबोधन का समापन जय हिंद के साथ किया।

बता दें कि शुक्रवार देर रात केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और केंद्रीय मंत्री डा. जितेंद्र सिंह की मौजूदगी में अपना अनशन समाप्त कर दिया। लंबे समय से चल रहे आंदोलन के बीच यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

अनशन समाप्त होने के बाद वांगचुक ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में संवाद ही किसी भी समस्या का सबसे प्रभावी समाधान है और उन्हें उम्मीद है कि सरकार उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करेगी।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि सरकार लोकतांत्रिक तरीके से उठाए गए सभी मुद्दों पर संवेदनशील है और बातचीत के माध्यम से समाधान निकालने के लिए प्रतिबद्ध है। वहीं, केंद्रीय मंत्री डा. जितेंद्र सिंह ने भी भरोसा दिलाया कि संबंधित विषयों पर सकारात्मक पहल की जाएगी और संवाद की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

सतर्क रहें, किसी भी हाल में हिंसा न होने दें

वांगचुक ने अपने एक्स हैंडल पर पोस्ट जारी करके देशवासियों से अपील की कि वे पूरी तरह सतर्क रहें और कहीं भी किसी भी प्रकार की हिंसा न होने दें। उन्होंने बताया कि केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा, डा. जितेंद्र सिंह तथा लेह-लद्दाख की एपेक्स बाडी के वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति में उन्होंने अनशन तोड़ने का निर्णय लिया।

उन्होंने लिखा कि इससे पहले विभिन्न राजनीतिक दलों के 65 सांसद उनसे मिल चुके थे या उन्हें अनशन समाप्त करने का आग्रह करते हुए पत्र भेज चुके थे।

वांगचुक के स्वास्थ्य में धीरे-धीरे हो रहा सुधार, दिया जा रहा तरल आहार

मेदांता-द मेडिसिटी में भर्ती सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है। मेदांता के चिकित्सा अधीक्षक डा. संजय दुरानी ने बताया कि सोनम वांगचुक ने अपना व्रत तोड़ दिया है और वर्तमान में उन्हें आवश्यकतानुसार तरल आहार दिया जा रहा है।

उनकी हालत स्थिर और सचेत है, और उनके स्वास्थ्य संबंधी संकेत सामान्य सीमा के भीतर हैं। उन्हें निरंतर निगरानी में रखा गया है। उनका उपचार उनकी सहमति और निर्धारित चिकित्सा प्रोटोकाल के अनुसार किया जा रहा है। शुक्रवार देर रात वांगचुग ने 27वें दिन अपना अनशन तोड़ दिया।

उन्हें मेडिसीन विभाग की वाइस चेयरमैन डा. सुशीला कटारिया के मार्गदर्शन में विशेषज्ञ चिकित्सकों की बहु-विषयक टीम की निगरानी में रखा गया है। डाक्टर लगातार उनकी जांच कर रहे हैं और आवश्यक दवाएं व पोषण दिया जा रहा है।

बता दें कि दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश पर मंगलवार शाम सफदरजंग अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद वांगचुक को विशेष एंबुलेंस से कड़ी सुरक्षा के बीच मेदांता लाया गया था। उन्हें सीधे आइसीयू में भर्ती किया गया, जहां लगातार निगरानी की जा रही है।

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