बंधवाड़ी लैंडफिल पर लीचेट प्रबंधन की योजना अटकी, डीटीआरओ प्लांट को नहीं मिली मंजूरी

गुरुग्राम। बंधवाड़ी लैंडफिल पर लीचेट (कचरे से निकलने वाला प्रदूषित तरल) के स्थायी प्रबंधन की योजना फिलहाल मुख्यालय में फाइलों में अटकी है। नगर निगम ने करीब 26 करोड़ रुपये के एस्टीमेट को मंजूरी के लिए जनवरी में शहरी स्थानीय निकाय विभाग को भेजा था, लेकिन अब तक स्वीकृति नहीं मिल सकी है।

बीच में विभाग की ओर से अवलोकन के लिए फाइल वापस निगम को भेजी गई थी। आवश्यक संशोधन और जवाब देने के बाद निगम ने फाइल दोबारा मुख्यालय भेज दी। निगम अधिकारियों का कहना है कि जुलाई में इस परियोजना को मंजूरी मिलने की संभावना है।

फिलहाल बंधवाड़ी लैंडफिल से प्रतिदिन करीब 200 केएलडी लीचेट टैंकरों के माध्यम से बहरामपुर एसटीपी भेजा जा रहा है, जहां उसको शोधित किया जाता है। यह व्यवस्था अस्थायी है और इस पर लगातार खर्च भी हो रहा है।

नगर निगम का मानना है कि डीटीआरओ (डिस्क डिफ्यूजर ट्यूब रिवर्स आस्मोसिस) प्लांट स्थापित होने के बाद लीचेट का उपचार लैंडफिल परिसर में ही किया जा सकेगा, जिससे परिवहन लागत कम होगी और पर्यावरण को होने वाले नुकसान से भी बचाव होगा।

  • 37 एकड़ से ज्यादा क्षेत्र में फैली है लैंडफिल।
  • 18 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा कूड़ा एकत्रित हो चुका है।
  • 150 केएलडी क्षमता का डीटीआरओ प्रस्तावित।
  • 26 करोड़ खर्च किए जाएंगे।
  • 200 केएलडी लीचेट प्रतिदिन निकल रहा है।

डीटीआरओ के साथ होने हैं ये काम

26 करोड़ रुपये के एस्टीमेट में 150 केएलडी क्षमता का डीटीआरओ प्लांट लगाने के अलावा लैंडफिल की चारदीवारी का निर्माण, पक्की ड्रेन, लीचेट टैंक और अन्य जरूरी आधारभूत सुविधाएं विकसित करने का प्रस्ताव शामिल है। स्वीकृति मिलने के बाद इन कार्यों पर काम शुरू होने की उम्मीद है।

मानसून में बढ़ सकती है लीचेट की समस्या

मानसून के दौरान वर्षा का पानी कचरे के ढेर में मिलने से लीचेट की मात्रा कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे में उसके संग्रहण और उपचार की चुनौती भी बढ़ जाती है। यदि समय पर पर्याप्त प्रबंधन नहीं किया गया तो अतिरिक्त लीचेट के रिसाव का खतरा बना रहता है।

अरावली वन्य जीवों और वन क्षेत्र को खतरा

बंधवाड़ी लैंडफिल अरावली क्षेत्र के निकट स्थित है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि लीचेट का प्रभावी प्रबंधन नहीं हुआ तो इसका असर आसपास के वन क्षेत्र, भूजल और वन्य जीवों पर पड़ सकता है। इस संबंध में वन्य जीव विभाग पहले भी नगर निगम को पत्र लिखकर आगाह कर चुका है और लीचेट प्रबंधन के निर्देश दिए थे। कई बार लीचेट लैंडफिल से रिसकर वन क्षेत्र तक पहुंच जाता है।

18 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा कूड़ा जमा

वर्तमान में बंधवाड़ी लैंडफिल में 18 लाख मीट्रिक टन से अधिक कचरा जमा है। लगभग 37 एकड़ से अधिक क्षेत्र में फैले इस कचरे के निस्तारण का कार्य दो निजी एजेंसियां कर रही हैं। नगर निगम ने जनवरी 2027 तक पुराने कचरे के निस्तारण का लक्ष्य तय किया है।

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