मन्नत पूरी होने पर श्री नैना देवी मंदिर पहुंचे पूर्व BJP अध्यक्ष नड्डा, कुल देवी के दरबार में की विशेष पूजा

बिलासपुर। भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने हिमाचल के बिलासपुर स्थित विश्व प्रसिद्ध शक्तिपीठ श्री नैना देवी मंदिर में शीश नवाया। जेपी नड्डा शनिवार सुबह अपने गृह जिले में स्थित माता के मंदिर पहुंचे। इस दौरान नड्डा विजयपुर स्थित अपने घर नहीं गए व यहीं से दिल्ली लौट गए। 

बंगाल चुनाव में भाजपा की बड़ी जीत के बाद वह श्रीनैना देवी के दरबार में पहुंचे। उन्होंने माता का आशीर्वाद प्राप्त किया। बताया जा रहा है कि नड्डा मन्नत पूरी होने पर मंदिर पहुंचे थे। श्री नैना देवी नड्डा परिवार की कुलदेवी हैं। बंगाल में पार्टी की जीत के बाद जेपी नड्डा ने मंदिर में विशेष पूजा अर्चना की। वह शाम को चंडीगढ़ में थे, जहां से सुबह मंदिर आए और फिर दिल्ली लौट गए।

वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ विशेष पूजा 

केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने मंदिर गर्भगृह में पहुंचकर विधिवत रूप से माता श्री नैना देवी की पूजा-अर्चना की। मंदिर के पुजारियों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ विशेष पूजा संपन्न करवाई गई। पूजा के दौरान उन्होंने देश और प्रदेश की सुख-समृद्धि, शांति और जनकल्याण की कामना की।

पुजारी वर्ग ने किया स्वागत

उनके मंदिर पहुंचने पर पुजारी वर्ग, मंदिर न्यास से जुड़े लोगों तथा भाजपा कार्यकर्ताओं ने स्वागत किया। जेपी नड्डा सुबह मंदिर परिसर पहुंचे, जहां मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार और पार्किंग स्थल पर पुजारियों ने पारंपरिक तरीके से उनका स्वागत किया। इस दौरान उन्हें माता की चुनरी और प्रसाद भेंट किया गया।

मंदिर परिसर “जय माता दी” के जयकारों से गूंज उठा। बड़ी संख्या में श्रद्धालु भी इस दौरान मंदिर परिसर में मौजूद थे।

पुलिस प्रशासन था मुस्तैद

मंदिर प्रशासन की ओर से भी केंद्रीय मंत्री के आगमन को लेकर विशेष प्रबंध किए गए थे। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नजर आया। मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

नड्डा की माता के प्रति गहरी आस्था

इस मौके पर भाजपा के कई पदाधिकारी, स्थानीय जनप्रतिनिधि और कार्यकर्ता भी मौजूद रहे। पार्टी कार्यकर्ताओं ने कहा कि जेपी नड्डा का माता श्री नैना देवी के प्रति विशेष आस्था भाव है और वह समय-समय पर यहां पहुंचकर माता का आशीर्वाद लेते रहते हैं।

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