
भुवनेश्वर। महाप्रभु जगन्नाथ की परंपरा और शास्त्रीय विधि-विधान को लेकर एक बार फिर इस्कॉन विवादों में घिर गया है।इस्कॉन पर आरोप है कि वह बार-बार मनमाने तरीके से महाप्रभु की परंपराओं को बदलने का प्रयास कर रहा है।
ताजा मामला लंदन के निकट वॉटफोर्ड स्थित इस्कॉन भक्तिवेदांत मैनर का है, जहां निर्धारित तिथि से पहले ही स्नान यात्रा और हाथी वेश का आयोजन कर दिया गया। इसे लेकर जगन्नाथ प्रेमियों और सेवायतों में भारी नाराजगी देखी जा रही है।
इस्कॉन शास्त्रीय मर्यादा का सम्मान करेगा
जानकारी के अनुसार, स्वयं गजपति महाराज ने इस विषय में इस्कॉन अधिकारियों को पत्र लिखकर, मुलाकात कर तथा चर्चा के माध्यम से शास्त्रसम्मत परंपराओं की जानकारी दी थी।उम्मीद जताई जा रही थी कि आध्यात्मिक संस्था होने के नाते इस्कॉन शास्त्रीय मर्यादा का सम्मान करेगा, लेकिन इसके बावजूद संगठन अपने फैसले पर कायम रहा।
सेवायतों का कहना है कि महाप्रभु का आविर्भाव ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन हुआ था और उसी तिथि पर स्नान यात्रा तथा हाथी वेश होना शास्त्रों में निर्धारित है। उनका तर्क है कि जिस प्रकार कोई व्यक्ति अपना जन्मदिन किसी अन्य दिन नहीं मनाता, उसी प्रकार महाप्रभु की स्नान यात्रा भी निर्धारित तिथि पर ही होनी चाहिए।इसके बावजूद इस्कॉन ने बिना तिथि के आयोजन कर परंपरा को आघात पहुंचाया है।
इस्कॉन भक्तिवेदांत मैनर को ज्ञापन सौंपा
बताया जा रहा है कि यूके में रह रहे प्रवासी ओड़िया समाज और जगन्नाथ भक्तों ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए 2 तारीख को इस्कॉन भक्तिवेदांत मैनर को ज्ञापन सौंपा था।ओड़िशा सोसाइटी ऑफ यूके और प्रवासी ओड़िया यूके की ओर से भेजे गए पांच पृष्ठों के पत्र में पुराणों, शास्त्रों और धर्मगुरुओं के मतों का हवाला देते हुए तिथि के महत्व को समझाया गया। हालांकि, इस्कॉन प्रबंधन ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया।
इधर, श्रीमंदिर के वरिष्ठ सेवायत विनायक दास महापात्र ने भी इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाया है।उन्होंने कहा कि आगामी द्वितीय रथयात्रा समन्वय बैठक में सरकार के समक्ष यह मामला जोरदार तरीके से उठाया जाएगा।
ओड़िशा में इस्कॉन के कार्यक्रमों का विरोध
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार इस्कॉन के विदेशी प्रबंधन से बातचीत कर अ-तिथि पर हो रहे स्नान यात्रा और रथयात्रा पर रोक नहीं लगाती, तो ओड़िशा में इस्कॉन के कार्यक्रमों का विरोध किया जाएगा।
महापात्र ने पुरी सांसद संबित पात्रा और अन्य नेताओं की चुप्पी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि करोड़ों जगन्नाथ भक्तों की भावनाएं आहत हो रही हैं, लेकिन अब तक किसी बड़े नेता ने इस विषय पर खुलकर प्रतिक्रिया नहीं दी है।
सेवायतों का कहना है कि अपनी सुविधा के अनुसार महाप्रभु की परंपराओं और उत्सवों का आयोजन करना किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हो सकता।

