
बाहरी दिल्ली। रोहिणी कोर्ट ने पांच वर्षीय बच्ची के साथ हैवानियत करने वाले दुष्कर्मी को दोषी करार दिया है। कोर्ट ने मात्र साढ़े पांच महीने की अपना निर्णय दिया। इसी सप्ताह सुनवाई के बाद कोर्ट सजा की घोषणा कर सकती है।
इस मामले में गत दिसंबर महीने में न्यायाधीश ने बच्ची की मेडिकल रिपोर्ट देखकर बिना वीआईआर (विक्टिम इम्पैक्ट रिपोर्ट) के ही पांच लाख रुपये सहायता राशि देने के निर्देश दिए थे। उस समय न्यायाधीश ने कहा था कि बच्ची से दरिंदगी का दर्द कल्पना से परे है।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमित सहरावत ने इस मामले की सुनवाई करते हुए 30 अप्रैल को आरोपित को अपहरण, 12 वर्ष से कम आयु की पीड़िता के साथ गंभीर चोटों के साथ दुष्कर्म और बीएनएस की धारा 137(2)/ 64(2)(1)/65(2) के अलावा पाक्सो अधिनियम की धारा 6 के तहत दोषी ठहराया गया। इस मामले में कुल 41 गवाह थे। घटना के समय बच्ची की उम्र चार साल आठ महीने व 27 दिन थी।
पिछले साल 17 नवंबर को हुई थी वारदात
झकझोर देने वाली यह घटना पिछले साल 17 नवंबर को हुई थी। विशेष लोक अभियोजक आदित्य कुमार ने कहा कि पीड़िता को लगी चोटें खुद ही साफ करती हैं। फोरेंसिक रिपोर्ट इस बात की पुष्टि करती है कि यह गलत काम आरोपित ने किया था, किसी और ने नहीं।
मौजूदा केस आरोपित के खिलाफ सीधे सबूतों पर आधारित है, जिसमें पीड़िता और पीड़िता की मां ने आरोपित के खिलाफ बयान दिए हैं। फोरेंसिक रिपोर्ट और सीसीटीवी फुटेज भी पीड़िता के बयानों की पुष्टि करते हैं।
बच्ची के साथ दरिंदगी सुन स्तब्ध रह गई थी कोर्ट
पीड़िता को अंतरिम आर्थिक राशि देने के मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट भी बच्ची की मेडिकल रिपोर्ट और स्वजन की बात सुनकर स्तब्ध रह गई थी।
आठ दिसंबर 2025 को कोर्ट ने पांच लाख रुपये अंतरिम सहायता राशि देने का आदेश दिया था और कहा कि बच्ची के साथ बर्बरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अंदरुनी अंगों के जख्मी होने के कारण बच्ची को शौच के लिए नली लगानी पड़ी है।
ठीक में लग सकता है एक साल
बच्ची के स्वजन ने कोर्ट को बताया कि बेटी को ठीक होने में एक साल से अधिक समय लग सकता है। इसके बाद भी पक्का नहीं कि बच्ची के अंग स्वभाविक तरीके से काम कर पाएंगे या नहीं।
इस दौरान कोर्ट ने पुलिस खासकर जांच अधिकारी के लापरवाह रवैये पर भी गंभीर टिप्पणी की थी। हालांकि, पुलिस ने विक्टिम इम्पैक्ट रिपोर्ट जमा नहीं कराई थी, इसके बावजूद कोर्ट ने अंतरिम मुआवजा राशि देने के निर्देश दिए थे।
16 दिन अस्पताल में भर्ती रही बच्ची
बच्ची के साथ दरिंदगी करने वाला पड़ोसी था और दोनों परिवार बिहार में एक ही गांव के रहने वाले हैं। घटना के दिन चाकलेट दिलाने के बहाने बच्ची को लेकर गया और सुनसान स्थान पर ले जाकर दुष्कर्म किया।
इसके बाद खुद ही बच्ची को घर तक उसकी मां के पास छोड़कर गया। बच्ची की हालत देखकर अस्पताल ले जाया गया। बच्ची 16 दिन अस्पताल में भर्ती रही। पुलिस ने आरोपित को अगले दिन गिरफ्तार कर लिया था।

