
नई दिल्ली। केरलम विधानसभा चुनाव के नतीजों के नौ दिनों बाद कांग्रेस ने मुख्यमंत्री पद के लिए वी.डी. सतीशन को नामित किया है। मुख्यमंत्री पद के लिए तीन दावेदारों के अड़ने के बाद जब बात आलाकमान तक पहुंची, तो सोनिया गांधी ने अपने सबसे भरोसेमंद और अनुभवी सहयोगी ए.के. एंटनी को फोन मिलाया। जिसके बाद वी.डी. सतीशान को केरल का अगला मुख्यमंत्री बनाने का रास्ता साफ हो गया।
दरअसल, केरलम में मुख्यमंत्री पद के तीनों उम्मीदवारों में से कोई भी पीछे हटने को तैयार नहीं था। कई दिनों से केरल के साथ लगातार बातचीत चल रही है – अजय माकन और मुकुल वासनिक जैसे पर्यवेक्षकों को विधायकों से बात करने के लिए भेजा गया था। इसके बाद विधायकों और अन्य नेताओं को राहुल गांधी को अपनी प्रतिक्रिया देने के लिए दिल्ली बुलाया गया।
एनडीटीवी ने सूत्रों के हवाले से बताया कि केरलम में मुख्यमंत्री पद के विवाद को सुलझानने के लिए सोनिया गांधी को बुलाया गया। सोनिया गांधी ने इस फैसले को सुलझाने के लिए केरलम से अपने सबसे पुराने और सबसे भरोसेमंद सहयोगी एके एंटनी को फोन किया और इसी एक बातचीत ने तय किया कि केरलम का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा।
एके एंटनी ने क्या दी सलाह?
एनडीटीवी ने सूत्रों के हवाले से बताया कि एके एंटनी ने सोनिया गांधी को सलाह दी, “केरल में कांग्रेस पार्टी को इस समय दो उपचुनाव नहीं लड़ने चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि यदि केसी वेणुगोपाल मुख्यमंत्री नियुक्त होते हैं, तो मौजूदा विधायक को अपनी सीट खाली करनी पड़ेगी। साथ ही, चूंकि वेणुगोपाल वर्तमान में सांसद हैं, इसलिए उनके संसदीय क्षेत्र में भी उपचुनाव कराना पड़ेगा।
एंटनी ने सोनिया गांधी से कहा कि कांग्रेस को ऐसी स्थिति से बचना चाहिए, क्योंकि आम चुनाव अभी हाल ही में संपन्न हुए हैं और बाद में होने वाले दो उपचुनावों के परिणाम अप्रत्याशित हो सकते हैं।”
एंटनी ने सोनिया गांधी से यह तर्क दिया कि मतदाताओं ने प्रभावी रूप से वी.डी. सतीशान के पक्ष में मतदान किया है और कांग्रेस पार्टी के सहयोगी दल भी उनके पक्ष में हैं। इसलिए पार्टी को दिल्ली से किसी उम्मीदवार को मुख्यमंत्री के रूप में थोपना नहीं चाहिए।
सोनिया गांधी और एके एंटनी के बीच फोन पर हुई इस वार्ता ने केरलम में मुख्यमंत्री के चयन के संबंध में पूरी तस्वीर बदल दी और सोनिया गांधी ने यह तय कर लिया कि केरल का मुख्यमंत्री कौन होना चाहिए।
कौन है एके एंटनी?
एके एंटनी केरलम के तीन बार मुख्यमंत्री रह चुके हैं और आखिरी बार उन्होंने 2001 में पदभार संभाला था। लेकिन 2004 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चे (यूडीएफ) की करारी हार के बाद, उन्होंने हार की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद से इस्तीफा दे दिया था।
इसके बाद, ओमन चांडी को मुख्यमंत्री नियुक्त किया गया, जबकि एंटनी केंद्रीय मंत्री के रूप में कार्य करने के लिए केंद्र में चले गए। एके एंटनी अपनी ईमानदारी और सोनिया गांधी के आधिकारिक आवास 10 जनपथ से निकटता के लिए लंबे समय से जाने जाते रहे हैं। वे ऐसे नेता भी हैं जिनके बारे में कहा जाता था कि वे हमेशा अपना त्यागपत्र अपनी जेब में रखते थे।

