12 जून से फरीदाबाद-गुरुग्राम के 4 टोल हो सकते हैं फ्री, विधायक ने भी की मांग; रिलायंस का टोल करार हो रहा खत्म

फरीदाबाद। फरीदाबाद से गुरुग्राम और सोहना हर दिन आने-जाने वाले एक लाख से अधिक लोगों को टोल टैक्स से अगले महीने राहत मिल सकती है। टोल वसूली करने वाली रिलायंस कंपनी का करार 12 जून को पूरा हो रहा है।

हालांकि, कंपनी ने करार आगे बरकरार रखने की अनुमति प्रदेश सरकार से मांगी है जो अभी विचाराधीन है। उधर, बड़खल विधानसभा क्षेत्र के विधायक धनेश अदलखा ने भी मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर टोल हटाने की मांग की है। करार आगे न बढ़ाने का भी आग्रह किया है।

दो फरीदाबाद और दो टोल गुरुग्राम में

इस परियोजना का नाम गुरुग्राम फरीदाबाद टोल रोड है। 2009 में इस परियोजना के तहत रिलायंस इंफ्रा कंपनी ने फरीदाबाद से गुरुग्राम और बल्लभगढ़ से सोहना तक सड़क बनाई गई थी। 2012 में यह काम पूरा हुआ जो रिलायंस कंपनी गुरुग्राम के बंधवाड़ी और नून्हेरा में और फरीदाबाद के पाखल और पाॅली क्रेशर जोन में चार टोल लगाकर वसूली करने लगी। परियोजना के तहत बनी सड़क के रखरखाव की पूरी जिम्मेदारी इसी कंपनी की है।

अब मियांद हो रही है पूरी

वसूली करने का समय 31 मई 2026 तक तय किया गया था। लेकिन कंपनी ने कई कारण गिनाते हुए 12 जून तक इसे बढ़ाने के लिए कहा, जिसे स्वीकार कर लिया गया है। इतना ही नहीं अब कंपनी वसूली की समय-सीमा और बढ़ाने के लिए सरकार से आग्रह कर रही है। हालांकि लोक निर्माण विभाग ने इसका विरोध किया है और यह समय-सीमा न बढ़ाने की सिफारिश की है।

“अक्सर गुरुग्राम व सोहना आना-जाना होता है। टोल टैक्स देने के बावजूद वाहनों की लंबी लाइन में लगना पड़ता है। जब समय-सीमा खत्म हो गई है तो टोल भी हटना चाहिए। इससे हजारों वाहन चालकों को राहत मिलेगी।”

-एडवोकेट ओपी शर्मा, पूर्व वाइस चेयरमैन, बार काउंसिल।

“फरीदाबाद के हजारों लोगों की रिश्तेदारी गुरुग्राम व सोहना में हैं। यहां से लोग नौकरी के लिए भी बड़ी संख्या में जाते हैं। इसलिए अब टोल हटना चाहिए। इससे लोगों की जेब पर बोझ कम होगा।”

-अनिल पाराशर, जिला पार्षद।

“इस टोल प्लाजा की निर्धारित समय सीमा पूरी होने वाली है। ऐसे में यदि सरकार इसे आगे न बढ़ाकर बंद कर देती है तो यह जनहित में बेहद सराहनीय कदम होगा। इसे आगे चलाना जनता पर अनावश्यक बोझ डालने जैसा होगा। फरीदाबाद-गुरुग्राम मार्ग सबसे व्यस्त रूट है। पीक आवर्स में टोल वसूली के चक्कर में जाम लग जाता है। इससे लोगों का समय तो बर्बाद होता ही है, साथ ही ईंधन भी फिजूल खर्च होता है। यदि यह टोल जनहित में खत्म किया जाता है तो इससे सरकार की छवि और मजबूत होगी।

-धनेश अदलखा, विधायक, बड़खल विधानसभा।

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