
गुरुग्राम। करोड़ों का बजट, 45 दिन तक लगातार नालों, सड़कों और ग्रीन बेल्ट की सफाई। इन तमाम प्रयासों और दावों के बीच मानसून की वर्षा में उफनते नाले हकीकत बयां कर रहे हैं। तेज वर्षा के दाैरान अभी भी कई ऐसे इलाके हैं, जहां जलभराव हो रहा है। पिछले दिनों हुई तेज वर्षा के दौरान कई रिहायशी क्षेत्र जलमग्न हो गए और प्रमुख सड़कों पर जलभराव से यातायात प्रभावित रहा।
नगर निगम, जीएमडीए, एचएसवीपी और एनएचएआइ ने मानसून से पहले नालों की सफाई का अभियान शुरू किया। इस दौरान नालों से गाद निकालने के साथ-साथ सड़कों और ग्रीन बेल्ट से मिट्टी भी हटाई गई। ग्रीन बेल्ट को सड़क स्तर से नीचे किया गया, ताकि वर्षा का पानी वहां एकत्र होकर भूजल रिचार्ज हो सके और सड़कों पर जलभराव कम हो।
इन कार्यों पर विभिन्न एजेंसियां मिलकर लगभग 400 करोड़ रुपये खर्च कर चुकी हैं। इसके बावजूद कई स्थानों पर नाले अब भी कचरे और गाद से अटे पड़े हैं।
158 जलभराव बिंदु, फिर भी परेशानी बरकरार
शहर में जलभराव के 158 संवेदनशील बिंदु चिह्नित हैं। इनमें से 120 से अधिक स्थानों पर संबंधित विभागों ने जलनिकासी के विशेष इंतजाम करने का दावा किया है। इसके बावजूद जुलाई के दूसरे सप्ताह में हुई वर्षा के दौरान कई सड़कें और कालोनियां पानी में डूब गईं। विशेषज्ञों का मानना है कि ड्रेनेज सिस्टम की क्षमता सीमित होने और कुछ स्थानों पर अधूरी सफाई के कारण यह समस्या लगातार बनी हुई है।
50 एमएम वर्षा तक ही सक्षम है ड्रेनेज सिस्टम
शहर का मौजूदा ड्रेनेज सिस्टम लगभग 50 मिलीमीटर तक की वर्षा का ही दबाव झेलने में सक्षम माना जाता है। इससे अधिक वर्षा होने पर नालों से पानी की निकासी धीमी पड़ जाती है और सड़कें जलमग्न होने लगती हैं। ऐसे में नालों की समय पर सफाई नहीं हाेने से यह परेशानी और ज्यादा बढ़ जाती है।
तालाबों के क्षेत्र में मिली राहत, 30 का काम पूरा
नगर निगम के मुख्य अभियंता विजय ढाका के अनुसार निगम क्षेत्र के सभी बरसाती नालों की सफाई मानसून से पहले पूरी कर ली गई थी। इसके साथ नए रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम भी विकसित किए गए हैं। निगम क्षेत्र के 74 तालाबों में से 30 का जीर्णोद्धार पूरा कर उन्हें बरसाती नालों से जोड़ दिया गया है।
हाल की वर्षा के बाद इनमें से कई तालाब पानी से भर गए हैं। शेष 44 तालाबों के सुधार का कार्य तेजी से चल रहा है, जिसमें गाद निकालना, साफ पानी की व्यवस्था, चारदीवारी, फुटपाथ और जल संरक्षण संबंधी कार्य शामिल हैं।
यहां सफाई नहीं हुई तो डूबेंगे क्षेत्र
शहर के कई हिस्सों में नालों की स्थिति ठीक नहीं है। कृष्णा कालोनी की गली नंबर-12 के बरसाती नाले में अब भी गाद और कचरा जमा है। मेदांता अस्पताल के सामने जीएमडीए ने हाल ही में नाले की सफाई तो करवाई, लेकिन उसे खुला छोड़ दिया गया, जिससे दुर्घटना का खतरा बना हुआ है।
सेक्टर-चार में बरसाती नाला गंदगी से भरा है और उस पर स्लैब भी नहीं डाले गए हैं। पालम विहार रोड के नाले में भी गाद जमा है, जबकि सेक्टर-नौ चौक के नाले की अब तक सफाई नहीं हो सकी है। यदि इन स्थानों पर जल्द सफाई नहीं हुई तो आगामी तेज वर्षा के दौरान जलभराव और लोगों की परेशानी और बढ़ सकती है।

