
बंगाल भाजपा विधायक दल की बैठक में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने देश से घुसपैठियों को बाहर करने का जो संकल्प जताया है उससे झारखंड की राजनीति पर भी असर पड़ना तय है।
झारखंड भाजपा राज्य के चार जिलों पाकुड़, साहिबगंज, गोड्डा और दुमका में अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों के बसने का मुद्दा लंबे समय से उठा रही है।
गृहमंत्री ने बंगाल में सरकार गठन के साथ ही बांग्लादेश सीमा पर सुरक्षा और घुसपैठियों को निकालना सबसे पहली प्राथमिकता बताया है।
झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी बांग्लादेशी घुसपैठ को आदिवासी समाज और संस्कृति के लिए खतरा बताते हुए इंटरनेट मीडिया पर पोस्ट कर चुके हैं। हालांकि, पिछले विधानसभा चुनाव में पार्टी ने बांग्लादेशी घुसपैठ का मुद्दा जोरशोर से उठाया था और इसमें सफलता नहीं मिली थी।
लेकिन बंगाल में इसी मुद्दे पर मिली सफलता ने राज्य में भाजपा के घुसपैठ पर चलने वाले अभियान को नई धार दी है। राजमहल के पूर्व विधायक अनंत ओझा ने कहा है कि अवैध घुसपैठ राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है जबकि झारखंड सरकार इन्हें सरंक्षण दे रही है।
आदिवासियों की कम होती जनसंख्या पर चिंता
नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने बंगाल में सरकार गठन के साथ ही बांग्लादेशी घुसपैठ की वजह से राज्य में कम होती आदिवासी जनसंख्या का सवाल उठाया है।
मरांडी 1951 से 2011 तक के जनगणना आंकड़ों के संदर्भ में राज्य में आदिवासियों और हिंदुओं की कम होती संख्या पर पहले भी भारत सरकार को पत्र लिख चुके हैं।
उन्होंने कहा है कि 1951 में आदिवासियों की जनसंख्या 35.38 प्रतिशत और हिंदुओं की 87.79 प्रतिशत थी। यह संख्या 2011 में घटकर 26.20 प्रतिशत और 81.70 प्रतिशत हो गई। वहीं, मुस्लिम आबादी 1951 में जहां 8.9 प्रतिशत थी जो 2011 में बढ़कर 14.53 प्रतिशत हो गई।
सरकारी योजनाओं का लाभ ले रहे घुसपैठिए
पूर्व विधायक और वरिष्ठ भाजपा नेता अनंत ओझा बांग्लादेशी घुसपैठियों द्वारा सरकारी योजनाओं का लाभ लेने का आंकड़ा विधानसभा में दे चुके हैं।
केंद्रीय गृहमंत्री के बयान के बाद झारखंड भाजपा इस मुद्दे को आने वाले समय में जोरशोर से उठाएगी। पूर्व मुख्यमंत्री चम्पाई सोरेन भी संताल परगना में लगातार इस मुद्दे पर आदिवासी समाज के बीच आंदोलन में लगे हैं।

