
श्रीनगर। केंद्र सरकार के खनन मंत्रालय ने मंगलवार को जम्मू-कश्मीर में चूना पत्थर (लाइमस्टोन) ब्लॉकों की दूसरी किस्त की नीलामी प्रक्रिया शुरू कर दी। इस अवसर पर वरिष्ठ अधिकारियों ने विश्वास जताया कि यह पहल केंद्र शासित प्रदेश में खनन आधारित औद्योगिक विकास और आर्थिक प्रगति को नई गति प्रदान करेगी।
दूसरी किस्त के तहत चूना पत्थर ब्लॉकों की नीलामी के उद्घाटन सत्र के मौके पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए भारत सरकार के खनन मंत्रालय के सचिव पीयूष गोयल ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में 12 चूना पत्थर ब्लॉकों को नीलामी के लिए रखा गया है और इनमें से कई ब्लॉकों में विशाल मात्रा में चूना पत्थर के भंडार मौजूद हैं।
उन्होंने कहा, ‘आज हमने जम्मू-कश्मीर में 12 लाइमस्टोन ब्लॉकों की दूसरी किस्त की नीलामी प्रक्रिया शुरू की है। हमें बोलीदाताओं के साथ बातचीत करने की खुशी है। कई ब्लॉक काफी बड़े हैं और इनमें उच्च गुणवत्ता वाले चूना पत्थर के समृद्ध संसाधन उपलब्ध हैं। हमें उम्मीद है कि यह प्रक्रिया सफल साबित होगी।’
खनन सचिव ने कहा कि भारत सरकार जम्मू-कश्मीर के तीव्र विकास को लेकर गंभीर है और इसी उद्देश्य से पारदर्शी एवं निष्पक्ष भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए नीलामी प्रक्रिया शुरू की गई है।
जम्मू-कश्मीर का विकास केंद्र की प्राथमिकता
उन्होंने कहा, “जम्मू-कश्मीर का विकास भारत सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। केंद्र सरकार ने यूटी प्रशासन के सहयोग के लिए यह प्रक्रिया शुरू की है ताकि सभी हितधारकों को समान अवसर मिल सके। आज हम बोलीदाताओं को पूरी प्रक्रिया और सभी ब्लॉकों की विस्तृत जानकारी दे रहे हैं।”
देशभर में खनन क्षेत्र की प्रगति का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वर्ष 2025-26 के दौरान भारत में रिकॉर्ड 212 खनिज ब्लॉकों की नीलामी की गई, जबकि इससे पहले औसतन हर वर्ष लगभग 100 ब्लॉकों की नीलामी होती थी।
उन्होंने कहा, “हमने न केवल खनिज ब्लॉकों की नीलामी में रिकॉर्ड बनाया है बल्कि खदानों को संचालन में लाने की प्रक्रिया में भी उल्लेखनीय सुधार किया है। वर्ष 2015 से 2024 तक केवल 58 खनिज ब्लॉक चालू किए गए थे, जबकि केवल 2025-26 में ही 36 ब्लॉक संचालन में आ गए।”
उन्होंने आगे बताया कि पिछले वर्ष संचालन में आए 36 ब्लॉकों में से 28 ग्रीनफील्ड परियोजनाएं थीं, जो खनन क्षेत्र में तेज विस्तार और विकास को दर्शाती हैं।
खनन क्षेत्र की कुल वृद्धि दर करीब 5.5 प्रतिशत
एक अन्य सवाल के जवाब में उन्होंने बताया पिछले वर्ष देश में चूना पत्थर और लौह अयस्क उत्पादन में लगभग 8 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई, जबकि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बावजूद खनन क्षेत्र की कुल वृद्धि दर करीब 5.5 प्रतिशत रही।
महत्वपूर्ण खनिजों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने लिथियम, निकेल, कोबाल्ट, ग्रेफाइट और वैनेडियम जैसे खनिजों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया है, क्योंकि ये हरित ऊर्जा परिवर्तन और रणनीतिक क्षेत्रों के लिए बेहद जरूरी हैं।
उन्होंने कहा, “पिछले दो वर्षों में महत्वपूर्ण खनिज ब्लॉकों की 46 सफल नीलामियां की गई हैं और 19 अन्य ब्लॉक वर्तमान में नीलामी प्रक्रिया में हैं। हम देश में एक मजबूत वैल्यू चेन विकसित करने की दिशा में काम कर रहे हैं।”
पर्यावरणीय चिंताओं पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि सतत और पर्यावरण-अनुकूल खनन सरकार की प्राथमिकता है। इसके लिए भारतीय खान ब्यूरो के माध्यम से स्टार रेटिंग प्रणाली लागू की गई है।
हर खदान के लिए तीन-स्टार रेटिंग अनिवार्य
उन्होंने कहा, “हर खदान के लिए कम से कम तीन-स्टार रेटिंग अनिवार्य है। यदि कोई खदान तीन वर्षों के भीतर यह रेटिंग हासिल नहीं करती, तो उसे बंद किया जा सकता है। हम खदानों को पांच और सात-स्टार रेटिंग तक पहुंचने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं ताकि पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना सतत खनन सुनिश्चित हो सके।”
अवैध खनन पर चिंता व्यक्त करते हुए खान सचिव ने कहा कि ड्रोन सर्वेक्षण, आरएफआईडी गेट पास और रियल-टाइम मिनरल विश्लेषण प्रणाली जैसी आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल से अवैध खनन पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।
उन्होंने कहा, “यदि तकनीक का सही उपयोग किया जाए तो अवैध खनन को पूरी तरह नियंत्रित किया जा सकता है। अन्यथा यह एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित होता रहेगा। सरकार निगरानी और पारदर्शिता के लिए कई तकनीक आधारित व्यवस्थाएं लागू कर रही है।”

